सरिता विशेष

सरकार वित्त वर्ष का समय 1 अप्रैल से बदल कर 1 जनवरी से करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. वित्त मंत्री अरुण जेटली संसद के मानसून सत्र में कह चुके हैं कि नया वित्त वर्ष 1 जनवरी से लागू करने के विविध पहलुओं पर विचार किया जा रहा है. अब तक वित्त वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है. यह व्यवस्था करीब डेढ़ सौ साल पुरानी है.

ब्रिटेन के साथ तालमेल रखने के लिए वित्त वर्ष की यह अवधि तय की गई थी. उस से पहले वित्त वर्ष 1 मई से 30 अप्रैल का होता था. सरकार इस व्यवस्था में बदलाव चाहती है. संसद की कई समितियां वित्त वर्ष की अवधि में बदलाव के पक्ष में रिपोर्ट दे चुकी हैं लेकिन किसी सरकार ने इन रिपोर्टों को क्रियान्वित कभी नहीं किया.

इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने भी वित्त वर्ष के समय में परिवर्तन पर सुझाव दिया है. समिति का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था दुनिया के कई देशों में है. भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह अवधि अनुकूल है. उन की सलाह है कि सरकार को इस पर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और राज्यों से भी सलाह लेनी चाहिए. यदि जल्दबाजी में यह निर्णय लिया जाता है तो इस से अर्थव्यवस्था पर गहरा व प्रतिकूल असर पड़ सकता है. सरकार यदि कलैंडर वर्ष के अनुसार वित्त वर्ष लागू करती है तो फिर बजट फरवरी के बजाय नवंबर में पेश किया जाएगा. सरकार 1 जनवरी से बजट आवंटन शुरू कर देगी.

इस बार आवंटन एक अप्रैल से शुरू हो गया है जबकि आवंटन वित्त वर्ष शुरू होने की पहली तिमाही पूरी होने से पहले नहीं हो पाता था. उस से विकास परियोजनाएं बाधित होती थीं. इसलिए मौजूदा सरकार का वित्त वर्ष के आरंभ में आवंटन शुरू करने का फैसला अच्छा है.