सरिता विशेष

शेयर बाजार में मई में उछाल का दौर रहा. सूचकांक थोड़ाबहुत उतारचढ़ाव के बीच भी लगभग तेजी पर ही रहा. अफवाहों के कारण कुछ दिन जरूर हलके रहे लेकिन ज्यादा समय तक बाजार में तेजी का ही रुख रहा. 8 मई को बीएसई का सूचकांक इस वर्ष दूसरी बार 20 हजार अंक के?स्तर को पार कर गया. इस से पहले ऐसा 18 जनवरी को हुआ.

बाजार में मजबूती का रुख रहा बढ़त का सिलसिला थमा नहीं और 16 मई को यह लगातार 3 दिन की बढ़त के बाद 28 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. इस दिन बाजार ने भले ही मामूली 34 अंक की बढ़त हासिल की थी लेकिन यह स्तर बाजार को लंबे समय बाद मिला है जिस से निवेशकों के चेहरों पर खुशी थी.

इस से पहले 29 अक्तूबर, 2007 को बाजार पहली बार 20 हजार अंक के पार पहुंचा था और फिर 8 जनवरी, 2008 को यह 21 हजार के स्तर को भी पार कर गया?था. फिर मंदी का दौर शुरू हुआ और बाजार ने लोगों को खूब छकाया.

बाजार कमजोर अर्थव्यवस्था के बावजूद ऊंचाई पर है और ब्याज दरें भी बढ़ नहीं रही हैं लेकिन शेयर सूचकांक चढ़ रहा है. विश्लेषकों को यह ट्रैंड समझ नहीं आ रहा है. उन का कहना है कि यह स्थिति स्थायित्व प्रदान करने वाली नहीं है. हालांकि कुछ जानकार कहते हैं कि कुछ माह तक बाजार में रौनक का यही माहौल बना रहेगा. ब्याज दरों में कटौती होती है तो भी सूचकांक हलका नहीं पड़ेगा. बाजार की तेजी की एक वजह कंपनियों के सकारात्मक परिणाम भी बताए जा रहे हैं.