उद्योगपति व बाबा रामदेव आक्रामकता को लक्ष्य साधने का शायद सब से बड़ा हथकंडा मानते हैं. इसी आक्रामकता की बदौलत विपरीत परिस्थितियों में घर छोड़ संन्यासी बने इस बाबा ने योग साधना की और जल्द ही योग के विशाल बाजार का आकलन कर इस का व्यापार आरंभ कर दिया. बड़ेबड़े योगसाधक योग बाजार पर कब्जा करने की उन की आक्रामकता के कारण बहुत पीछे छूट गए. योग की क्रियाओं का टीवी चैनल पर प्रसारण देख लोग उन की तरफ आकर्षित होने लगे और पतंजलि योग आश्रम खोल कर बाबा दिग्गज नेताओं और अभिनेताओं के सहारे देश के सब से चर्चित योगगुरु बन गए. धनबल अपाररूप से बढ़ने लगा तो बाबा ने खा- वस्तुओं का कारोबार शुरू कर दिया. उन्होंने आयुर्वेदिक दवाओं की कंपनी खोल ली और नूडल जैसे खा- पदार्थ बना कर विदेशी कंपनियों को चुनौती देने लगे.

बाबा ने अपनी कंपनी के उत्पादों का विज्ञापन खुद ही किया. इस दौड़ में आगे निकलने के लिए उन्होंने विज्ञापन नीति की परवा किए बिना अपने सामान को डाबर तथा हिंदुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड के नाम ले कर उन से बेहतर बताना शुरू कर दिया. किसी कंपनी का नाम ले कर अपने सामान को श्रेष्ठ बताना विज्ञापन नीति का उल्लंघन है. लेकिन बाबा हैं कि उन के लिए कानून और नीतियों का कोई मतलब नहीं है. भारतीय विज्ञापन मानक परिषद ने भी इसे गलत बताया है. इन कंपनियों ने विज्ञापनों पर नजर रखने वाले अन्य संस्थानों से भी शिकायत की है. लेकिन बाबा हैं कि अपने उत्पादों को लगातार उन के उत्पाद से अच्छा होने का दावा कर रहे हैं.

दरअसल, यह इन चतुर बाबा की बाजार पर कब्जा करने की रणनीति का हिस्सा है. वे जानते हैं कि नीतियों में बंधी कंपनियों को मात देने का तरीका आक्रामकता ही है. बहरहाल, उम्मीद की जानी चाहिए कि नियमों का उल्लंघन न हो, क्योंकि नियम अराजकता से बचाते हैं.