सरकार कंपनियों पर नकेल कसने की तैयारी में जुट गई है. हेराफेरी करने वाली कंपनियों की सूची तैयार की जा रही है. 2-3 सालों से जिन कंपनियों ने अपना वित्तीय विवरण नहीं दिया है उन के खिलाफ कार्यवाही की तैयारियां चल रही हैं और अब तक करीब 3 लाख ऐसी कंपनियों की सूची तैयार हो चुकी है. उन के खिलाफ कार्यवाही की प्रक्रिया बाद में शुरू की जाएगी.

इस के अलावा लंबे समय से व्यवसाय नहीं करने वाली कंपनियों के निदेशकों के खिलाफ भी सख्ती बरती जाने की तैयारी है. इस के तहत किसी भी पंजीकृत कंपनी के 5 साल से अधिक समय से निदेशक का पद संभाले मालिकों के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है.

सरकार का मानना है कि इस तरह की कंपनियों का इस्तेमाल अवैध रूप से पैसे के लेनदेन के लिए किया जाता है. कंपनी अधिनियम कानून के तहत किसी कंपनी का मालिक लगातार निदेशक नहीं रह सकता है. इस में एक महत्त्वपूर्ण नियम यह भी है कि 2-3 वर्षों तक वित्तीय विवरण जमा नहीं करने वाली कंपनियों में मालिक खुद निदेशक नहीं रह सकता है. इस तरह की कंपनियों के नाम पर जम कर फर्जीवाड़ा चल रहा है और उन में से कई के निदेशक लगातार गलत तरीके से लेनदेन में जुटे हैं. ये फर्जी कंपनियां सिर्फ कागजों पर चल रही हैं. जमीन पर कुछ भी नहीं है. यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से जारी है लेकिन इस पर ध्यान ही नहीं दिया गया है.

सरकार के कदम से फर्जीवाड़ा तो रुकेगा ही, साथ ही देश के व्यवसायियों के लिए काम करने का अच्छा माहौल व मौका मिलेगा. वे अपनी बात कायदे से रख सकेंगे और फर्जी निदेशकों की भीड़ छंट जाएगी. ये फर्जी निदेशक प्रैस लिखे वाहनों की तरह हैं जो व्यवसाय में कई बार बड़े बाधक बनते हैं. उन पर रोक लगाई जानी जरूरी है.

COMMENT