नोटबंदी के कदम से सब की आलोचना झेलने के बाद डिजिटल इंडिया को ले कर आ रही रिपोर्ट सरकार के लिए राहत देने वाली बन रही है. डिजिटल का तेजी से प्रयोग हो रहा है. सरकार ने भी इस को बढ़ावा देने के लिए इस साल के बजट आवंटन को 3,075 करोड़ कर दोगुना किया है.

डिजिटल भारत के लिए इस आवंटन का इस्तेमाल सब से ज्यादा देश के दूरदराज के गांवों को हौटस्पौट से जोड़ने के लिए किया जा रहा है. इस के तहत 10 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा. सरकार का प्रयास गांव को ब्रौडबैंड सेवा दे कर डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देना है.

डिजिटल इंडिया को ले कर वैश्विक रिपोर्ट उत्साह बढ़ाने वाली है. सेवाप्रदाता कंपनी मोर्गन स्टेनली ने अपनी एक रिपोर्ट में हाल ही में कहा है कि डिजिटल क्षेत्र में लंबी छलांग का भारतीय जीवन पर व्यापक असर हो रहा है और इस से सामाजिक बदलाव आ रहा है. इस से नागरिकों की असमानता घटेगी, वित्तीय समावेशन बढ़ेगा, लोगों के जीवनस्तर में सुधार आएगा और पारदर्शिता तथा कृषि आदि क्षेत्रों में इस का व्यापक असर देखने को मिलेगा.

रिपोर्ट में, हालांकि, देशवासियों के डेटा की गोपनीयता से जुड़े जोखिम को सही मानते हुए आधार और बायोमैट्रिक प्रणाली में डेटा लीक की आशंका से इनकार नहीं किया गया है.

रिपोर्ट का सार यह है कि डिजिटल इंडिया में जो तेजी आई है उस से देशवासियों के जीवनस्तर में सुधार आएगा. डिजिटल लेनदेन की प्रक्रिया में तेजी नोटबंदी के बाद आई है. बाजार में नकदी की भारी कमी के कारण लोगों ने डिजिटल को अपनाया और बड़े स्तर पर लेनदेन शुरू हुआ जो धीरेधीरे लोगों के स्वभाव का हिस्सा बनने लगा.

सरकार अब गांवों में वाईफाई हौटस्पौट को बढ़ावा दे कर ग्रामीण इलाकों तक इस का विस्तार करेगी.