सरिता विशेष

शहरों से ले कर गांवों तक गरम दूध का काम तेजी से बढ़ता जा रहा है. जाड़े के दिनों में यह कारोबार पहले भी खूब चलता था, अब यह पूरे साल चलने लगा है. शहरों में इस का चलन ज्यादा है. गरम दूध में केसर डाल कर भी बेचा जाता है. कहींकहीं दुकानों में इसे बेचने के लिए मिट्टी के कुल्हड़ों का इस्तेमाल किया जाता है, इसीलिए इसे कुल्हड़ वाला दूध भी कहते हैं.

कुल्हड़ वाले 200 मिलीलीटर दूध की कीमत 20 रुपए तक होती है. आमतौर पर आजकल 1 लीटर दूध करीब 50 रुपए प्रति लीटर की दर से मिलता है. 1 लीटर दूध को गरम करने पर करीब 200 मिलीलीटर दूध कम हो जाता है. ऐसे में 1 लीटर दूध में 4 कुल्हड़ दूध तैयार होता है. 20 रुपए प्रति कुल्हड़ की दर से यह कीमत 80 रुपए हुई. इस तरह से 1 लीटर दूध बेचने में करीब 30 रुपए की बचत होती है. इस में से अगर चीनी, कुल्हड़ और ईंधन की कीमत निकाल दें, तो भी करीब 15 रुपए का मुनाफा बेचने वाले को होता है. इस प्रकार से गरम दूध का करोबार करना काफी मुनाफे का सौदा होता है.

उत्तर प्रदेश में दूध की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है. ऐसे में पशुपालन करने वाले किसानों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं. उत्तर प्रदेश में रोजाना 635 लाख लीटर दूध की मांग है, पर 435 लाख लीटर दूध की आपूर्ति ही रोज होती है. जनता की इस परेशानी को दूर करने के लिए सरकार ने अमूल जैसी बड़ी कंपनी को प्रदेश में अपनी डेरी खोलने की इजाजत दे दी है. यह एशिया की सब से बड़ी डेरी होगी. अमूल से जुड़े लोगें का मानना है कि अमूल को रोज जितने दूध की जरूरत होगी, उतना दूध उत्तर प्रदेश के किसानों से नहीं मिल पाएगा. ऐसे में उन को बाहरी प्रदेशों से दूध खरीदना पड़ सकता है. अगर प्रदेश के किसान ही दूध उत्पादन में ध्यान देंगे तो दूध कारोबार को नई दिशा दी जा सकती है.

उत्तर प्रदेश में पराग जैसी बड़ी कंपनियां दूध बेचने का काम कर रही हैं. इस के अलावा कई छोटीछोटी कंपनियां भी दूध कारोबार में लगी हैं. उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार ने प्रदेश में दूध की कमी को पूरा करने के लिए अमूल कंपनी को लखनऊ में डेरी खोलने की इजाजत और सुविधाएं दी हैं. अमूल को लखनऊ शहर से लगे चक गजरिया फार्म में 20 एकड़ जमीन इस के लिए दी गई है. संघ आणंद मिल्क यूनियन लिमिटेड (अमूल) बनासकांठा सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ पालनपुर गुजरात की इकाई है. सरकार ने अमूल को छूट दी?है कि अगर उत्तर प्रदेश के किसानों से पूरी मात्रा में दूध न मिल पाए तो वह बाहर के किसानों से दूध खरीद सकती है. अमूल को 20 एकड़ जमीन 48 सौ रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से दी गई है. अमूल कंपनी रोजाना 5 लाख लीटर दूध की बाजार में आपूर्ति करेगी. प्लांट लगाने के लिए अमूल को 18 महीने का समय दिया गया है.

दूध बेचने वाली कंपनियां 40 से 50 रुपए प्रति लीटर की दर से दूध बेच रही हैं. इन कंपनयों ने पिछले 2 सालों में दूध की कीमतों में 40 फीसदी का इजाफा किया है. दूध के साथ दूध से बनने वाली दूसरी चीजों जैसे खोया, पनीर, मक्खन, घी और दही के दाम भी तेजी से बढ़े हैं. आमतौर पर खोया 400 रुपए प्रति किलोग्राम, पनीर 300 रुपए प्रति किलोग्राम, दही 60 से 120 रुपए प्रति किलोग्राम, मक्खन 400 रुपए प्रतिकिलोग्राम और घी 450 रुपए प्रति किलोग्राम की दर  बाजार में बिकता है.

चारे ने बढ़ाई दूध की कीमत

लोगों में दूध के साथ ही साथ दूध से बनने वाली चीजों की मांग भी बढ़ी है. इन में खोया, दही, पनीर, रबड़ी, मलाई, आइसक्रीम, मट्ठा और मक्खन शामिल हैं. इस मांग के मुताबिक दूध की आपूर्ति में बदलाव नहीं हुआ है. चारे की कमी के कारण दुधारू पशुओं का पालन करने वालों के सामने परेशानी रहती है. 1 भैंस को चारा खिलाने पर हर रोज करीब 150 रुपए का खर्च आता है. आजकल चोकर करीब 1100 रुपए, खली व चूनी करीब 1400 रुपए और भूसा करीब 300 रुपए प्रति क्विंटल के?भाव से मिल रहा है. बीते 1 साल में इन की कीमत 50 फीसदी तक बढ़ गई है.

आमतौर पर 1 भैंस रोज 6 लीटर दूध देती है, जिसे ज्यादा से ज्यादा 20 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचा जाता है. इस हिसाब से 6 लीटर दूध 120 रुपए का हुआ. बिचौलिए पशुपालकों से 20 रुपए प्रति लीटर की दर से दूध लेते हैं. इसे वे 25 से 28 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बेचते हैं. इस प्रकार बिचौलियों को प्रति लीटर दूध से 5 से 8 रुपए का लाभ हो जाता है. अमूल और पराग जैसी कंपनियां भी इसी तरह से मुनाफा कमा रही हैं.