भारी कर्ज तले दबी विमानन कंपनी एयर इंडिया को उबारने के लिए सरकार तैयार हो गई है. सरकारी विमानन कंपनी के विनिवेश की कोशिशों के बावजूद कोई खरीदार नहीं मिलने पर वित्त मंत्रालय खुद मदद की तैयारी में जुट गया है.

सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय ने दो अलग-अलग तरीके से एयर इंडिया की मदद करने की योजना बनाई है. इसके तहत मंत्रालय तत्काल प्रभाव से कंपनी को दो हजार करोड़ रुपये की बैंक गारंटी देने को तैयार हो गया है. इसका मतलब है कि बैंक ये रकम एयर इंडिया को देगा और वित्त मंत्रालय इसकी गारंटी लेगा.

इसके अलावा कंपनी के कर्ज का बड़ा हिस्सा स्पेशल पर्पज व्हीकल को ट्रांसफर किया जा सकता है. साथ ही कर्ज की जिम्मेदारी कम करने के लिए नकद सहायता भी दी जा सकती है. इन दोनों तरीकों पर वित्त मंत्रालय इस हफ्ते ही विचार करेगा. योजना के तहत मिलने वाली 2000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी का इस्तेमाल विमानन कंपनी के रोजमर्रा के खर्चों में होगा.

नहीं मिला था खरीदार

इससे पहले सरकार ने एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश की कोशिश की थी, लेकिन कंपनी पर 54 हजार करोड़ से ज्यादा के कर्ज के चलते कोई खरीदार सामने नहीं आया. वर्ष 2007 में इंडियन एयरलाइंस के विलय के बाद से एयर इंडिया घाटे में है. सुरेश प्रभु ने भी कहा था कि बड़े कर्ज के साथ सेवा देना संभव नहीं है.

स्थायी मदद के लिए दो तरह की रणनीति बनाई

वित्त मंत्रालय ने कंपनी की स्थायी मदद करने की भी रणनीति बनाई है, जिस पर इस सप्ताह विचार-विमर्श किया जाएगा. इसके तहत दो तरह की योजना बनाई गई है.

  1. कंपनी के कुल कर्ज में से 35,484 करोड़ स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) में ट्रांसफर किए जाएं. इसी एसपीवी में एयर इंडिया के रीयल एस्टेट की संपत्तियों, जमीन व सब्सिडी को भी ट्रांसफर किया जाए. एसपीवी दो साल में इन संपत्तियों को बेचकर कर्ज उतारेगी.
  2. दूसरे प्रस्ताव के तहत शेष बचे 19,236 करोड़ रुपये में से 7000 करोड़ रुपये सरकार तत्काल एयर इंडिया को दे दे. इसमें से 6000 करोड़ रुपये सितंबर तक और 400 करोड़ रुपये दिसंबर तक जबकि 600 करोड़ रुपये अगले साल मार्च तक कंपनी को दे दिए जाएं.