सरिता विशेष

हाल ही में एक चौंकाने वाली खबर आई थी कि फेसबुक जैसी कंपनियों द्वारा हटाए गए कुछ कर्मचारियों ने दावा किया है कि कंपनी फेसबुक यूजर्स के पर्सनल चैटिंग को गुपचुप तरीके से रिकौर्ड कर रही है. यह गैरकानूनी कार्य है और इस से कई निजी बातों की गोपनीयता भंग हो सकती है. इस तरह की खबरें पहले भी आती रही हैं, इसलिए हाल में यूजर्स चैट रिकौर्ड की खबर ज्यादा चौंकाने वाली साबित नहीं हुई.

नागरिकों के अधिकारों के हनन को रोकने का जिम्मा शासन, प्रशासन का है, उसे इस पर ध्यान देना चाहिए. कुछ इसी तरह का कदम पिछले दिनों जरमनी सरकार ने उठाया है. उस ने फेसबुक से व्हाट्सऐप डाटा रिकौर्ड को खत्म करने के लिए कहा है. जरमनी के यूजर्स के हितों के संरक्षण पर ध्यान देने वाले संगठन ने कंपनी से कहा है कि वह इस संबंध में हुए समझौते का पालन करे.

समझौते में कहा गया था कि फेसबुक यूजर्स के फोन नंबर तथा अन्य डाटा को व्हाट्सऐप पर शेयर नहीं किया जाएगा लेकिन कंपनी इस का उल्लंघन कर निर्बाध गति से निजी डाटा रिकौर्ड कर रही थी. डाटा हटाने के लिए कोई कानूनी अधिकार भी जरमनी सरकार के पास नहीं था. इस के बावजूद जरमनी की सरकार ने सख्ती दिखाते हुए फेसबुक को उस दिशा में कदम उठाने के लिए कहा. फेसबुक ने भी डर के कारण यह घोषित कर दिया है कि वह जरमनी की भावना का सम्मान करती है. लेकिन सवाल यह है कि बिना इजाजत के फेसबुक किसी की निजता को कैसे बांट सकती है. यह निजता अधिकारों का उल्लंघन है और अमेरिकी कंपनियां इस तरह के उल्लंघन से हिचकिचाती नहीं हैं.

दूसरा मतलब यह हुआ कि फेसबुक पूरी दुनिया की सूचना रखती है. वह किसी देश, कंपनी, संगठन या व्यक्ति की निजता का इस्तेमाल खुद के हितों के लिए कर सकती है. इस पर सभी सरकारों को पैनी निगाह रखने की जरूरत है.