डेबिट कार्ड से लेनदेन करने वाले लोगों के चेहरे पर यह खबर मुस्कन लेकर आने वाली है. ऐसा इसलिए क्योंकि रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आर.बी.आई.) ने डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजैक्शन और उसपर लगने वाले चार्जेज को लेकर एक अहम कदम उठाया है.

रिजर्व बैंक ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एम.डी.आर.) को वाजिब स्तर पर लाने के लिए डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर अलग-अलग मर्चेंट डिस्काउंट की दरें तय की हैं. इसके तहत केंद्रीय बैंक ने कार्ड के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाली मर्चेंट इकाइयों के नेटवर्क का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से शुल्क स्तरों में बदलाव किया है. इसका एक लक्ष्य बैंकों को नकदी रहित या कम नकदी वाली प्रणालियों में निवेश को प्रोत्साहित करना है. इस नियम को 1 जनवरी से लागू किया जाएगा.

क्या होता है एम.डी.आर. (MDR)

कोई बैंक किसी मर्चेंट या व्यापारिक ईकाई को डेबिट और क्रेडिट कार्ड सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जो शुल्क लगाता है उसे ही मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एम.डी.आर. कहते हैं.

क्या हुआ है बदलाव

रिजर्व बैंक की ताजा अधिसूचना के अनुसार 20 लाख रुपए तक के सालाना कारोबार वाले छोटे मर्चेंट के लिए एम.डी.आर. शुल्क 0.40 प्रतिशत लगेगा. जिसमें प्रति सौदा शुल्क की सीमा 200 रुपए होगी. यह शुल्क डेबिट कार्ड से आनलाइन या पी.ओ.एस. के जरिए लेनदेन पर लागू होगा. वहीं अगर किसी मर्चेंट इकाई का सालाना कारोबार 20 लाख रुपए से अधिक है तो एम.डी.आर. शुल्क 0.90 प्रतिशत होगा और इसमें प्रति लेनदेन 1,000 रुपए शुल्क की सीमा होगी.

वहीं 20 लाख रुपए तक के सालाना कारोबार वाले छोटे मर्चेंट के द्वारा क्यूआर कोड आधारित लेनदेन करने पर शुल्क 0.30 प्रतिशत रहेगा और इसमें प्रति सौदा 200 रुपए शुल्क की सीमा होगी. जबकि क्यूआर कोड के जरिए 20 लाख रुपए से अधिक लेनदेन पर 0.80 प्रतिशत शुल्क व अधिकतम शुल्क राशि 1000 रुपए ही रहेगी.

एमडीआर घटने से क्या होगा

अगर आने वाले दिनों में एमडीआर चार्जेज बैंक घटाते हैं, तो इसका फायदा आम आदमी को भी मिलेगा. एमडीआर चार्जेज कम होने से जब भी आप प्वाइंट आफ सेल्स मशीन से डेबिट कार्ड से लेनदेन करेंगे, तो आपको एक्स्ट्रा फीस कम या ना के बराबर भरनी पड़ेगी.

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