सरिता विशेष

कुछ समय पहले एक सर्वेक्षण आया था कि उड्डयन जैसे क्षेत्र में भी युवाओं को रोजगार के लिए परेशान होना पड़ रहा है. देश या विदेश में भारी खर्च कर के युवा पायलट या चालक दल का सदस्य बनने के लिए ठोकरें खा रहा है लेकिन उसे रोजगार नसीब नहीं हो रहा. सरकारी विमानन कंपनी से ज्यादा पाने के चक्कर में निजी क्षेत्र में गए अनुभवी पायलट भी परेशान हैं. इस खबर को देख कर लगा कि किसी भी क्षेत्र में जाइए, नौकरी का बड़ा संकट है. लेकिन यदि आप में काबिलीयत है तो सफलता हाथ पकड़ कर मंजिल तक ले जाएगी और फिर सारी सुविधाएं दे कर शर्त भी रखेगी कि यही नौकरी करनी पड़ेगी.

नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने भी आजकल यही नीति अपना ली है. उस की दिक्कत है कि केबिन क्रू यानी चालक दल के सदस्य बिना पूर्व सूचना के इस्तीफा दे देते हैं. इस तरह की स्थिति में एअरलाइंस के लिए यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने का संकट पैदा हो जाता था. कंपनी की अंतिम समय में उड़ान तक रद्द करनी पड़ती थी जिस से यात्रियों को भी दिक्कत होती.

प्राधिकरण के लिए कर्मचारियों का यह रुख जनहित के विरुद्ध है और कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही करने वाला कदम है. कई विदेशी एअरलाइंस के साथ भारतीय एअरलाइंस का कड़ा कंपीटिशन चल रहा है और आखिरी क्षण में यदि चालक दल के सदस्य के त्यागपत्र के कारण उड़ान रद्द होती है तो कंपनी की परेशानी बढ़ जाती है. इस तरह की संकटकारक स्थिति से निबटने के लिए प्राधिकरण को फिलहाल एक बड़ा कदम यही सूझा है कि अब पूर्व सूचना दिए बिना कोई क्रू सदस्य इस्तीफा नहीं देगा. इस्तीफा देने के लिए उसे कम से कम 3 महीने पहले सूचना देनी होगी. इस तरह की लगाम कसने से स्थिति कितनी नियंत्रित होगी, यह तो समय ही बताएगा लेकिन इस से साफ हो गया है कि कंपनी और कर्मचारियों का एकदूसरे के लिए विशेष महत्त्व है और उन्हें परस्पर सहयोग के जरिए ही आगे बढ़ना चाहिए.