सरिता विशेष

देश की राजनीति में यौन उत्पीड़न बड़ा मुद्दा बना हुआ है और इस बुराई पर रोक लगाने के लिए चर्चा का दौर जारी है. ऐसे में एक मोबाइल सेवाप्रदाता कंपनी के इस संदेश, ‘‘हम ने 3जी, 4जी का इतिहास बनाया है, परंपराओं और मूल्यों का नहीं,’’ का मतलब कंपनियों में यौन उत्पीड़न नहीं हो, इस तरफ विशेष ध्यान दिलाता है. यह अलग बात है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं. इस का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि 2014 में महिला आयोग में यौन उत्पीड़न की 346 घटनाएं दर्ज की गईं जबकि 2013 में यह आंकड़ा 249 था. वर्ष 2011 में महज 169 मामले ही दर्ज किए गए थे.

ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एडिडास, डोमिनोज, डनकिन, आईबीएम, बीएमएस, कोकाकोला जैसी मशहूर कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए कार्यशालाएं आयोजित कर के उन्हें समझा रही हैं कि किस तरह की हरकत कार्यस्थल पर यौन शोषण के दायरे में है, साथ ही, उन से कैसे बचना है तथा इस तरह की हरकत पर किस तरह की सजा का प्रावधान किया गया है. इन कंपनियों में छोटेछोटे समूह बना कर एक निश्चित अवधि तक कर्मचारियों को यौन उत्पीड़न रोकने के लिए जरूरी जानकारी दी जाती है. इन कार्यशालाओं में कर्मचारी रोकथाम के उपायों पर बातें करते हैं. उन्हें विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण भी दिया जाता है. कार्यशालाओं में कर्मचारियों को यह भी बताया जा रहा है कि यौन उत्पीड़न की घटनाओं में दंड का प्रावधान क्या है और यौन अपराध के खिलाफ किस तरह के कदम उठाने हैं. इस तरह के प्रयास कार्यस्थल पर यौन अपराध की घटनाएं रोकने में जरूर सफल होंगे लेकिन यौन अपराध जैसे संगीन मामलों में झूठे आरोप लगाने पर दंड के विधान को भी प्रचारित किया जाना चाहिए.