सीरिया में चल रहे तनाव से पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं. रोजाना तय होने वाले रेट का बोझ तो पहले ही आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है. लेकिन, अब वैश्विक स्तर पर गहराते संकट से इसमें और तेजी आने की उम्मीद है. सीरिया हमले के बाद रूस और अमेरिका में भी तनातनी है. तनाव इतना बढ़ चुका है कि कुछ जानकारों को तीसरे विश्व युद्ध की आहट नजर आने लगी है. दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है. सीरिया पर अमेरिकी मिसाइलों के बरसने का असर आपकी जेब पर भी पड़ सकता है. वजह है अचानक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल. यदि यह दौर जारी रहा तो भारत में भी पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत बढ़ सकती हैं.

80 डौलर के पार जा सकता है क्रूड

दरअसल, क्रूड औयल के दाम पहले ही तीन साल से ज्यादा की ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं. ऐसे में सीरिया संकट और ईरान पर नए प्रतिबंध की तैयारी से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम पर असर पड़ना तय है. रिसर्च फर्म जेपी मौर्गन के मुताबिक, ब्रेंट क्रौड के दाम 80 डौलर प्रति बैरल के पार जा सकते हैं. फिलहाल, ब्रेंट क्रूड का दाम 71.85 डौलर प्रति बैरल है.

क्या जताई गई है आशंका

जेपी मौर्गन के मुताबिक अमेरिका के सीरिया पर हमले के कारण मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है. साथ ही ईरान पर भी अमेरिका नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है. ऐसे में क्रूड औयल की कीमतों में बढ़ा उछाल देखने को मिल सकता है. अगर कच्चे तेल की कीमतें 80 डौलर तक पहुंचती हैं तो जाहिर तौर पर भारत में इसका असर पेट्रोल-डीजल पर पड़ेगा. फिलहाल, भारत में मुंबई में पेट्रोल के दाम सबसे ज्यादा है. इस वक्त मुंबई में पेट्रोल के दाम 82 रुपए तक पहुंच चुके हैं. अगर क्रूड में तेजी आती है तो यह आंकड़ा 90 के आसपास पहुंच सकता है.

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क्यों महंगा होगा पेट्रोल

एक्सपर्ट के मुताबिक, भारतीय तेल कंपनियां ज्यादातर तेल इंपोर्ट करती हैं. साथ ही इसका भुगतान भी अमेरिकी डौलर में होता है. अगर ब्रेंट क्रूड के दाम बढ़ते हैं तो उन्हें भुगतान भी ज्यादा करना होगा. तेल कंपनियों पर बढ़ने वाला बोझ को कंपनिया आगे बढ़ाएंगी. साथ ही रुपए के भाव पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलेगा. यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल के दाम में तेजी देखने को मिल सकती है.

महंगाई बढ़ने की भी आशंका

डौलर का भाव बढ़ने से रुपया कमजोर होगा. ऐसे में महंगाई बढ़ने का भी खतरा है. रुपया कमजोर होने से सभी तरह के इंपोर्ट महंगे हो जाएंगे. साथ ही कच्चे तेल के लिए भी ज्यादा कीमत चुकानी होगी. इसका सीधा असर सरकार के राजकोषीय घाटे पर भी पड़ेगा. सरकार की उधारी बढ़ेगी और घाटा भी बढ़ता जाएगा. इससे आम आदमी पर भी दोहरी मार पड़ने की आशंका है.

सीरिया पर हमले से कच्चे तेल में आग

अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने संयुक्त रूप से सीरिया के ठिकानों पर मिसाइल हमला किया था. इस हमले के बाद से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा है. कच्चे तेल के दाम पर इसका असर देखने को मिला. पिछले हफ्ते ब्रेंट क्रूड की कीमत 8.6 फीसदी बढ़कर नवंबर 2014 के बाद से सबसे ज्यादा के स्तर पर पहुंच गई.

तनाव बढ़ा तो कीमतें बढ़ना तय

जेपी मौर्गन के मुताबिक, सीरिया ग्लोबल पेट्रोलियम सप्लाई का केवल 0.04 फीसदी ही उत्पादन करता है, जो कि क्यूबा, न्यूजीलैंड और पाकिस्तान से भी कम है, लेकिन इसके पड़ोस में मौजूद कई देश बड़े तेल उत्पादक हैं. सीरिया की सीमा ईराक से मिलती है, जो OPEC (और्गनाइज़ेशन औफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) का दूसरा सबसे बड़ा मेंबर है. इसके तुरंत बाद सऊदी अरब और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देश हैं. अगर तनाव बढ़ेगा तो तेल की कीमतों पर भी बुरा असर पड़ेगा.

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