देश की सब से बड़ी दूरसंचार कंपनी भारतीय एयरटेल अब शायद बाजार की हिस्सेदारी में निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी आइडिया सैल्युलर से पिछड़ जाएगी. संचार बाजार में रिलायंस का जियो आने के बाद से हलचल मची है. सब के समक्ष बाजार में बने रहने की चुनौती है. एयरटेल ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए टैलीनौर से समझौता किया, लेकिन अब आइडिया और वोडाफोन का विलय हो रहा है. सरकार ने अपना पैसा वसूल करने की शर्त पर दोनों कंपनियों के विलय को मंजूरी दे दी है.

इस विलय के बाद आइडिया अब एयरटेल से ग्राहक संख्या में आगे निकल जाएगी. वोडाफोन को स्पैक्ट्रम, लाइसैंस शुल्क आदि का सरकार को 9 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान करना है. कंपनी विलय से पहले यह भुगतान करने को तैयार है. आइडिया सैल्युलर ने सरकार को बता दिया है कि वोडाफोन पर जो भी बकाया है वह खुद उस का भुगतान करने पर सहमत है. आइडिया के इस करारनामे के मद्देनजर सरकार से विलय की मंजूरी मिल गई है और दोनों कंपनियों के बीच जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने हैं. इस की भी लगभग सभी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं.

दूरसंचार बाजार में रिलायंस जियो के निशुल्क सेवा देने और बाजार आधार बढ़ाने की रणनीति के बाद हड़कंप मचा हुआ है. एयरटेल के समक्ष बाजार का पहला खिलाड़ी होने का तमगा बचाने की चुनौती थी, इसलिए उस ने टैलीनौर जैसी कंपनियों का खुद में विलय भी किया, लेकिन पिछली कुछ तिमाहियों से कंपनी लगातार घाटे में चल रही है. आइडिया का यह समझौता निश्चितरूप से पहले नंबर की जंग में उसे जिता देगा. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि कारोबारी घरानों की इस जंग में उपभोक्ता संरक्षण बरकरार रहना चाहिए.