नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि डौलर के मुकाबले रुपये में गिरावट को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि रुपया अपनी स्वाभाविक मूल्य स्थिति में लौट रहा है. वह यहां नाबार्ड के एक कार्यक्रम से अलग पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. कुमार ने कहा कि पिछले तीन साल में रुपया 17 प्रतिशत बढ़ा है.

जबकि इस साल की शुरुआत से रुपया 9.8 प्रतिशत गिरा है. इसलिये यह अपने स्वाभाविक मूल्य की तरफ लौट रहा है. राजीव कुमार ने कहा कि रुपये का मूल्य वास्तविक तौर पर तय होना चाहिए न कि इसे अत्याधिक बढ़ा दिया जाना चाहिए.

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सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रुपया

विनिमय दर वह मानक है जो मांग और आपूर्ति के बीच सही संतुलन को दर्शाता है. कुमार ने कहा कि लोगों को इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि रुपये में मजबूती बेहतर अर्थव्यवस्था का संकेत है. जब उनसे पूछा गया कि रुपये में गिरावट चिंता का विषय है या नहीं तो उन्होंने कहा, ‘एक हद तक नहीं.’ गौरतलब है कि गिरावट के दौर को जारी रखते हुए डौलर के मुकाबले रुपया गुरुवार को 43 पैसे और गिरकर 70.32 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया.

हालात 2013 के मुकाबले काफी अच्छे

इससे पहले आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में रुपये की गिरावट पर कहा कि रुपये में गिरावट चिंता का विषय नहीं है. उन्होंने कहा कि एमर्जिंग मार्केट्स के हालात 2013 के मुकाबले काफी अच्छे हैं. इसलिए रुपये के गिरने से कोई खतरा नहीं है. दरअसल, भारत में महंगाई दर दुनिया के मुकाबले ज्यादा है, ऐसे में रुपये में थोड़ी और कमजोरी देखने को मिल सकती है. उन्होंने कहा कि हालात बेहतर होने के लिए रुपये में और कमजोरी आनी चाहिए.

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