नोटबंदी की पिछले साल 8 नवंबर को की गई घोषणा कुछ लोगों के लिए बहार ले कर आई तो कुछ के लिए आफत. नोटबंदी के कारण कई लोगों के समक्ष विवाह आदि के सामाजिक दायित्वों के निर्वहन का संकट पैदा हो गया था तो कुछ के लिए यह अवसर बन कर आया है. काली कमाई वालों ने लोगों के खातों में पैसा जमा करा दिए और बाद में उन से वसूल लिए होंगे.

यही वजह है कि रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 99 फीसदी पुराने नोट लौट आए हैं. सरकार पर विपक्ष तीर चला रहा है कि काली कमाई देश में नहीं थी, इसलिए पैसा रिजर्व बैंक में लौट आया है. सरकार इस हमले से सख्त हो गई है. अपना फैसला जायज बताते हुए उस ने उन खातों की सूची तैयार कर दी है जिन में नोटबंदी के दौरान आय के ज्ञात स्रोतों से ज्यादा पैसा आया था.

इस तरह करीब साढ़े 13 लाख बैंक खातों को आयकर विभाग ने संदेह के घेरे में रख दिया है. इन में से कइयों से पूछताछ भी की जा रही है. नोटबंदी के बाद इन खातों में 2.90 लाख करोड़ रुपए जमा किए गए थे. इन में करीब 9 लाख खाते ऐसे हैं जिन में नोटबंदी के बाद बड़ा पैसा जमा किया गया था. अब सवाल है कि नोटबंदी से पहले यह पैसा घर पर क्यों रखा गया था? नोटबंदी की घोषणा होते ही यह पैसा अचानक बैंकों में कैसे पहुंच गया? इन पैसों का स्रोत पता किया जा रहा है. रिजर्व बैंक का कहना है इस तरह के 35 हजार से ज्यादा खाताधारकों से पूछताछ की गई है. उन से बैंकों ने औनलाइन जानकारी मांगी है. इन मामलों की बारीकी से  छानबीन कर के दोषियों को जेल भेजा जाना आवश्यक है. इस के लिए दंड का कड़ा प्रावधान किया जाना चाहिए. लोग अब रिकौर्ड में आने वाले मामलों में भी खुल्लमखुल्ला चोरी करने लगे हैं. यह ढीठपन रुके, भ्रष्टाचारी डरे, इसलिए सीधे जेल की व्यवस्था होनी चाहिए.