देश में डिजिटल भुगतान का ग्राफ लगातार उठ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को जब 500 और 1,000 रुपए के पुराने नोट बंद करने की घोषणा की थी तो देश में नकदी का संकट बढ़ गया था. उसी दौरान डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन मिला. डिजिटल लेनदेन के लिए तब कई कंपनियां अपने उत्पाद ले कर बाजार में उतरीं और ग्राहकों को लुभाने लगीं. खुद सरकार ने भीम जैसा ऐप बाजार में उतारा.

प्रधानमंत्री ने लोगों को नकदी की किल्लत से बचने के लिए डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी थी. अचानक डिजिटल लेनदेन का आंकड़ा उछल गया और लोग चाय की दुकान पर भी डिजिटल भुगतान के जरिए चाय पीने लगे. इस तरीके को कई लोगों ने अपना लिया और अब वे लगातार इसी का इस्तेमाल कर रहे हैं.

उसी का परिणाम है कि एक सर्वेक्षण के अनुसार, देश में आज 40 अरब डौलर का लेनदेन डिजिटल प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है. इस का प्रचलन लगातार लोकप्रिय हो रहा है. अगले 2 वर्षों में डिजिटल लेनदेन के ढाई गुना बढ़ कर करीब 100 अरब डौलर तक पहुंचने का अनुमान है.

पिछले 4 वर्षों में औनलाइन भुगतान करने वालों की संख्या दोगुना हो कर 43 करोड़ हो चुकी है. सरकार लगातार डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित कर रही है और इस में महिलाओं तथा वृद्धों को जोड़ने के लिए योजनाएं बना रही है.

सरकारी स्तर पर अधिकारी डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन दें, इस के लिए खुद प्रधानमंत्री उन कर्मचारियों को पुरस्कृत करेंगे जिन्होंने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है. वे लोक सेवा दिवस के मौके पर 21 अप्रैल को इन कर्मचारियों को पुरस्कार देंगे.

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