आज हर कोई खुद का घर लेना चाहता है पर महंगाई के इस दौर में घर लेना या खुद का आशियाना लेना आसान नहीं है. ऐसे में आपके घर लेने के सपने को पूरा करता है होम लोन. फाइनैंशियल प्लानर अविनाश दुबे के मुताबिक कार लोन या पर्सनल लोन आप की देनदारी को बढ़ाते हैं, जबकि होम लोन लेने से आप एक संपत्ति के मालिक बनते हैं. कुछ समय तक जरूर इस की ईएमआई भरनी  पड़ती है पर आप को किराया देने से भी तो मुक्ति मिल जाती है. होम लोन लेते वक्त यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो यह यकीनन आप के लिए फायदे का सौदा साबित होगा. आइये जानें होमलोन से जुड़ी कुछ खास बातों के बारें में-

एकसाथ करें आवेदन

अगर आप और आप के कई मित्र एकसाथ होम लोन लें, तो यह लोन आप के लिए सस्ता पड़ेगा. कहने का मतलब है कि जब मिल कर लोन लिया जाता है, तो बैंक या वित्तीय संस्थान को इस की प्रोसैसिंग और कानूनी कार्रवाई पर कम खर्च करना पड़ता है, जिस का फायदा निश्चित तौर पर बैंक ग्राहकों को दिया जाता है. जिसके चलते बैंक आप की प्रोसैसिंग फीस और अन्य शुल्क माफ कर देता है.

महीने के अंत में आवेदन करना बेहतर

अगर आप महीने की 24 तारीख के बाद लोन के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो आप को डिस्काउंट मिलने की संभावना ज्यादा होती है. बैंकों की कोशिश होती है कि वे अपने हर महीने का लोन टारगेट पूरा करें. ऐसे में यह संभावना ज्यादा होती है कि इस अवधि में बैंक आप को किफायती दर पर होम लोन उपलब्ध कराएं.

अच्छी क्रैडिट रेटिंग है जरूरी

बैंक अपने पुराने और विश्वसनीय ग्राहकों को किफायती दर पर होम लोन उपलब्ध कराने की कोशिश करते हैं. इसलिए जरूरी है कि आप अपने क्रैडिट कार्ड बिल और बाकी की देनदारियों का भुगतान समय पर करें. इस से आप की क्रैडिट रेटिंग दुरुस्त रहेगी और सस्ता होम लोन मिल सकेगा.

पात्रता का प्रावधान

किसी व्यक्ति को कितना लोन मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस की ग्रौस सैलरी कितनी है. उदाहरण के तौर पर वेतनभोगी वर्ग को सालाना आय का 4 गुना होम लोन दिया जा सकता है. इस के अलावा चार्टर्ड अकाउंटैंट, डाक्टर जैसे पेशेवरों को उन की सालाना आय का 7 गुना तक लोन दिया जा सकता है.

हालांकि लोन देते वक्त बैंक इस बात का भी खयाल रखते हैं कि व्यक्ति की टेक होम सैलरी या फिर नैट सैलरी ग्रौस सैलरी के 40 फीसदी से कम न हो. इस के अलावा होम लोन के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति की क्रैडिट रिपोर्ट पर भी गौर किया जाता है. अगर कर्ज चुकाने का पुराना रिकौर्ड दागदार है, तो संभव है ऐसे व्यक्ति को लोन मिले ही नहीं या मिले भी तो अपेक्षाकृत अधिक ब्याज दर पर.

बढ़ा सकते हैं होम लोन की पात्रता

आपके लोन की अवधि जितनी लंबी होगी उतना ज्यादा आपको लोन मिल सकेगा. प्रति लाख रुपए पर मासिक किश्त लंबी अवधि के लोन के लिए काफी कम होती है. ऐसी स्थिति में बैंक उसी आय पर ज्यादा लोन दे देते हैं.

अपनी लोन की पात्रता बढ़ाने का दूसरा तरीका यह है कि जिन रिश्तेदारों को बैंक अनुमति देते हैं आप उन की और अपनी आय मिला कर जौइंट लोन ले सकते हैं. इस में आप के जीवनसाथी, बच्चे, माता-पिता या भाई-बहन शामिल हो सकते हैं. एक शादीशुदा महिला भी अपने सास-ससुर या अपने पति की आय मिला कर जौइंट लोन ले सकती है.

हालांकि वह अपने मां-बाप के साथ जौइंट लोन नहीं ले सकती है. अगर आप के पास डाउन पेमैंट देने के लिए पर्याप्त राशि है, तो आप को बड़ा लोन लेने की जरूरत नहीं है. इस से आप पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा नहीं. लोन देते वक्त बैंक आप से किसी पुराने रीपेमैंट की जानकारी मांग सकता है. इस के लिए आप किसी पुराने लोन (कार लोन या फिर किसी अन्य लोन) की रीपेमैंट का प्रूफ दे सकते हैं.

वरिष्ठ नागरिकों को भी है फायदा

आमतौर पर वरिष्ठ नागरिकों को ज्यादा लंबी अवधि वाला लोन नहीं दिया जाता. उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति 60 साल का है, तो उसे ज्यादा से ज्यादा 5 साल तक की अवधि वाला होम लोन ही मिल सकता है. यह समस्या भी जौइंट होम लोन लेने से दूर हो जाती है. अगर कोई वरिष्ठ नागरिक किसी कम उम्र वाले के साथ मिल कर लोन के लिए आवेदन करता है तो उसे लंबी अवधि का लोन भी मिल सकता है.

लोन के लिए आवेदन करने से पहले

क्रैडिट इन्फौर्मेशन ब्यूरो औफ इंडिया लिमिटेड यानी सिबिल से आप अपनी क्रैडिट रिपोर्ट मंगवा कर यह जान सकते हैं कि आप का रिकौर्ड और स्कोर क्या है. साल में एक बार 450 खर्च कर सिबिल से क्रैडिट स्कोर पाने के बाद आप यह जान सकते हैं कि आप का कर्जदाता आप के आवेदन को किस प्रकार देखेगा.

अगर क्रैडिट रिपोर्ट में कोई विसंगति पाई जाती है जैसे आप ने क्रैडिट कार्ड के तमाम बिलों का भुगतान किया हुआ है, लेकिन रिपोर्ट में यह दर्शाया गया है कि आप ने बिलों का भुगतान नहीं किया है और इस कारण आप की क्रैडिट रिपोर्ट प्रभावित हुई है, तो आप भुगतान के सुबूत के साथ संबंधित बैंक से बातचीत कर सकते हैं. ऐसे सुबूत के साथ आप सीधे सिबिल से संपर्क कर अपनी सूचना सही करवा सकते हैं.

इन बातों का रखें खयाल

– नए या फिर जिन कर्जदाताओं के बारे में ज्यादा जानकारी न हो उन से लोन लेने से बचें.

– लोन लेते समय कम से कम 4-5 अलग-अलग कर्जदाताओं की ब्याज दर, लागत, आवेदन प्रक्रिया में सरलता और भुगतान की सरलता तथा पुराने कर्जदारों के अनुभव के बारे में जरूरी  जानकारी ले लें.

– ब्याज दरों और अन्य शुल्क की तुलना के लिए आप औनलाइन पोर्टल का भी सहारा ले सकते हैं.

– कर्जदाताओं के रेट रीसैट, फौर क्लोजर की शर्तों का अध्ययन बेहद जरूरी है.

– ऐसे कर्जदाताओं का चुनाव करें जिन के प्रीपेमैंट के नियम और शर्तें आसान हों.