सरिता विशेष

बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई में सितंबर के आखिरी सप्ताह में गिरावट का रुख रहा लेकिन अक्तूबर की शुरुआत से ही सेंसेक्स तेजी पर आ गया और 10 अक्तूबर को सूचकांक 3 सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया.

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) की बिकवाली के दबाव में पिछले माह के अंत में बाजार में सुस्ती रही. इस की वजह अर्थव्यवस्था के सुस्त पड़ने की खबरें थीं. सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में गिरावट को ले कर चारों तरफ से सरकार पर जम कर हमले हुए और इस बहस से बीएसई भी अछूता नहीं रहा और शेयर सूचकांक में गिरावट दर्ज की गई. इस अवधि में बाजार में 638 अंक की जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई. इसी बीच, रिजर्व बैंक ने ब्याजदरों में कोई कटौती नहीं की और इस का सीधा असर बाजार में देखने को मिला.

शेयर बाजार का सूचकांक 4 अक्तूबर तक लगातार चौथे सत्र में तेजी पर रहा. दूसरे सप्ताह की शुरुआत कुछ फीकी रही लेकिन अगले ही सत्र में बाजार ने तेजी पकड़नी शुरू कर दी. इस दौरान दौरान डौलर के मुकाबले रुपए पर भी सकारात्मक असर देखने को मिला और रुपया मजबूत स्थिति में पहुंचा.

पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा के अपनी ही सरकार की अर्थनीतियों पर बागी तेवर दिखाने से भी बाजार में अर्थव्यवस्था को ले कर संदेह का माहौल रहा और शेयर बाजार के सूचकांक में उथलपुथल देखने को मिली.