संचार क्रांति का लाभ देश के हर नागरिक तक पहुंचे, इस के लिए दूरसंचार विभाग की अगले 2 वर्षों में ढाई लाख ग्रामपंचायतों को सार्वजनिक वाईफाई हौटस्पौट से जोड़ने की योजना है. सरकार इस में 10 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगी. वाईफाई हौटस्पौट से गांवों को लैस करने के लिए जल्द ही नए ढंग से निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी. विभाग इस कार्य के पहले चरण में अब तक एक लाख ग्रामपंचायतों में औफिशियल फाइवर बिछाने का कार्य पूरा कर चुका है. अब उस ने हाईस्पीड ब्रौडबैंड से जोड़ने के वास्ते निविदा प्रक्रिया को शुरू कर दिया है. प्रक्रिया के तहत एक ग्रामपंचायत में 5 हौटस्पौट स्थापित किए जाएंगे. इस काम को 2022 तक पूरा किया जाना है.

पहले जो निविदा निकाली गई थी उस के तहत ढाई लाख गांवों में एकएक हौटस्पौट लगाया जाना था और इस पर 4 हजार करोड़ रुपए खर्च आने का अनुमान था लेकिन संशोधित योजना के तहत इन ढाई लाख ग्रामपंचायतों में अब हर पंचायत में 5 हौटस्पौट लगेंगे और उस की लागत बढ़ा कर अब ढाईगुना ज्यादा कर दी गई है. मोबाइल फोन आज हर हाथ की शान बन गया है और स्मार्टफोन का क्रेज शहरों से ले कर गांवों तक फैल चुका है. इस लिहाज से यह योजना अच्छी है, लेकिन हालत यह है कि महानगरों में नैटवर्क की गुणवत्ता बहुत खराब है.

सेवाप्रदाता कंपनियां अपनी बचत की जुगत में रहती हैं और लोगों को नाममात्र की सेवा दे रही हैं, इसलिए उपभोक्ता पोर्टेबिलिटी के जंजाल में फंसा रहता है. जरूरत सेवा गुणवत्ता पर ध्यान देने की है, खानापूर्ति के लिए आंकड़ों का खेल खेलने की नहीं.