केंद्र सरकार के कई पूर्व कर्मचारियों की अकसर यह शिकायत रहती है कि आधारकार्ड नहीं होने के कारण उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद पैंशन नहीं मिल रही है.

केंद्र सरकार के कई पूर्व कर्मचारियों की अकसर यह शिकायत रहती है कि आधारकार्ड नहीं होने के कारण उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद पैंशन नहीं मिल रही है. कई कर्मचारियों ने भारतीय विशिष्ट पहचान संख्या प्राधिकरण से आधारकार्ड नहीं बनवाया. इस की वजह है कि वे सरकारी कर्मचारी सेवाकाल में अपने पहचानपत्र के सब जगह चलने के कारण आधारकार्ड को महत्त्व नहीं देते.

आधारकार्ड एक विशिष्ट पहचानपत्र है इसलिए यह हर व्यक्ति के पास होना चाहिए. यह पासपोर्ट या चुनाव मतदाता पहचानपत्र से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह बायोमैट्रिक आधार पर तैयार किया जाता है. ऐसा है तो फिर कोई भी व्यवस्था से ऊपर नहीं होना चाहिए, लेकिन देश की सब से बड़ी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी केंद्रीय कर्मचारी होते हैं और शासनप्रशासन में उन्हीं की चलती है. अपनी सुविधा के लिए वे जो चाहते हैं, करते हैं. सरकार उन की बात मानने के लिए एक तरह से बाध्य होती है. उन्हें लगता है कि यदि वे आम आदमी की तरह आधारकार्ड बनावाएंगे तो उन की विशिष्टता को ठेस पहुंचेगी. इसी अहंकार के चलते आईएएस लौबी ने सरकार पर दबाव बनाया और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र प्रसाद से कहलाया कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पैंशन पाने के लिए आधारकार्ड जरूरी नहीं है.

केंद्र सरकार के पूर्व सामान्य कर्मचारियों को भी इस घोषणा का लाभ मिलेगा, यह संतोष की बात है. केंद्र सरकार के 48.41 लाख कर्मचारी हैं और 61.4 लाख कर्मचारी पैंशनभोगी हैं. इन कर्मचारियों के लिए अब आधार पहचान के वास्ते आवश्यक नहीं है, लेकिन उस का इस्तेमाल जीवन प्रमाणपत्र के लिए ये कर्मचारी कर सकेंगे. इस व्यवस्था का विरोध नहीं है, लेकिन देश के हर नागरिक की पहचान का माध्यम एक होने पर किसी के विशेष होने का अहंकार सेवानिवृत्ति के बाद खत्म तो होना ही चाहिए.