सरिता विशेष

आप और आप के पारिवारिक सदस्य उन लोगों में शामिल हो सकते हैं जिन्हें साइबर लुटेरों से एटीएम का विवरण देने के लिए फोन कौल आया हो. हो सकता है आप या आप के परिचित इस के शिकार भी हुए होंगे. यह पूरे देश की समस्या है. लगभग हर फोन तक इन लुटेरों की पकड़ है और उन्हें जानकारी है कि आप का खाता किस बैंक में है.

पहले तो उन लुटेरों के चंगुल में काफी लोग फंस जाते थे, लेकिन अब इस बारे में काफी जागरूकता आ चुकी है और बैंकों ने भी खूब प्रचार कर दिया है कि उन की तरफ से कोई फोन कौल खाताधारक को नहीं की जाती है. इस के बावजूद देश में साइबर अपराधों की बाढ़ आई है और बड़े स्तर पर लोगों की गाढ़ी कमाई एक क्लिक में ही लुट रही है, सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में बताया कि पिछले वित्त वर्ष में साइबर धोखाधड़ी के कारण जनता के 16 हजार 789 करोड़ रुपए डूबे हैं.

रिजर्व बैंक की धोखाधड़ी रिपोर्ट में यह सूचना दी गई है. इस में वह राशि शामिल नहीं है जिस की रिपोर्ट नहीं लिखी जाती है. करोड़ों भोलेभाले लोगों के खातों से एक झटके में ये लुटेरे पैसे लूट रहे हैं. उस की रिपोर्ट पुलिस में होनी चाहिए लेकिन पुलिस रिपोर्ट नहीं लिखती. साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए साइबर सुरक्षा फौरेंसिक और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों की रिजर्व बैंक ने एक समिति बनाई है और इस समिति को साइबर अपराध रोकने के लिए उपाय सुझाने को कहा गया है. यह समिति जब तक रिपोर्ट देगी और तब तक कितने लोग लुट चुके होंगे इस बारे में अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता है.