वीडियोकौन लोन मामले में आईसीआईसीआई बैंक की एमडी व सीईओ चंदा कोचर की मुश्किलें बढ़ गई हैं. केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और वीडियोकौन ग्रुप के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है. लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद अब ये तीनों देश छोड़कर विदेश नहीं जा सकेंगे. इस मामले में अभी तक सीबीआई की तरफ से लुकआउट नोटिस जारी होने की पुष्टि नहीं की गई है. वेणुगोपाल धूत के अनुसार यह गलत खबर है. धूत ने जांच के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी.

एहतियात के तौर पर जारी किया नोटिस

वीडियोकौन ग्रुप को 3250 करोड़ रुपये का लोन देने के मामले में पिछले दिनों सीबीआई ने पीई (Preliminary Enquiry) शुरू की थी. माना जा रहा है कि धोखाधड़ी के कई मामलों में विदेश भागने की बात सामने आने के चलते सीबीआई ने एहतियात के तौर पर लुकआउट नोटिस जारी किया है. इससे पहले सीबीआई ने आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से वीडियोकौन ग्रुप को दिए गए 3,250 करोड़ रुपये के लोन के मामले में शुक्रवार को चंदा कोचर के देवर राजीव कोचर से करीब 9 घंटे तक पूछताछ की.

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राजीव कोचर से भी पूछताछ

सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि राजीव कोचर मुंबई में सीबीआई कार्यालय में पेश हुए. उनसे वीडियोकौन को दिए गए ऋण की रिस्ट्रक्चरिंग के विभिन्न पहलुओं के बारे में पूछताछ की गई. ‘अविस्ता एडवाइजरी’ के संस्थापक राजीव कोचर से ऋण के संबंध में वीडियोकौन को दी गई मदद के बारे में जानकारी की गई. राजीव को गुरुवार पूर्वाह्न लगभग 11 बजे मुंबई हवाईअड्डे पर आव्रजन अधिकारियों ने उस समय रोक लिया था, जब वह सिंगापुर रवाना होने वाले थे.

यह है मामला

वीडियोकौन ग्रुप के मालिक वेणुगोपाल धूत पर आरोप है कि उन्होंने साल 2008 से 2011 के बीच चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को अपनी एक कंपनी कुछ लाख रुपये में बेच दी. इसके बाद अपनी एक कंपनी से करीब 3 करोड़ रुपये का लोन दिया. बाद में 2012 में आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकौन समूह को 3,250 करोड़ रुपये का लोन दिया और 2017 में इसमें से करीब 2800 करोड़ रुपये एनपीए घोषित कर दिया.

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