सरकार देश में बैंकिंग व्यवस्था में सुधार के लिए बैंकों के एकीकरण की प्रक्रिया को तेज करेगी. उस के लिए सब से पहले बैंकों के बोर्डों की तरफ से सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा. उन प्रस्तावों के मद्देनजर केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालयों का एक पैनल बनाएगी. पैनल के अध्यक्ष वित्त मंत्री अरुण जेटली होंगे.

वित्त मंत्री का दावा है कि इस से बैंकों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बैंकिंग प्रणाली ज्यादा मजबूत होगी और अर्थव्यवस्था को भी इस का फायदा होगा. उन्होंने आश्वस्त किया है कि इस प्रक्रिया में किसी कर्मचारी का अहित नहीं होगा.

सरकार का बैंकों के विलय का यह दूसरा प्रयास है. एक साल पहले देश के सब से बड़े स्टेट बैंक औफ इंडिया में 6 बैंकों का विलय किया गया था. इस विलय के बाद निश्चितरूप से सरकार का भरोसा बढ़ा है और उस ने राष्ट्रीकृत बैंकों को निजी हाथों में सौंपने के बजाय उन के एकीकरण की दिशा में काम करने का फैसला लिया है.

जानकार कहते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बैंकों का सरकारीकरण कर देश के बैंकिंग क्षेत्र में क्रांतिकारी पहल करने के बाद इस क्षेत्र में सुधार का दूसरा प्रयास पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव सरकार की उदार अर्थव्यवस्था वाली नीति के दौरान हुआ था. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैंकिंग सुधार की मिसाल बन कर देश में मजबूत बैंकिंग प्रणाली विकसित करना चाहते हैं. देश में सरकारी क्षेत्र का एसबीआई बहुत बड़ा बैंक बन गया है. वहीं, कुछ बैंक बहुत छोटे हो गए हैं. बैंकिंग व्यवस्था में प्रतिस्पर्धा लाने में यह अंतर बड़ी खामी बन रहा है, इसलिए सरकार का फैसला उचित है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि बैंकों के एकीकरण से बैंकिंग तंत्र में सुधार आएगा और वे खुद ही अपनी जरूरत पूरी करने में सक्षम होंगे. वे हर जरूरत के लिए सरकार पर निर्भर नहीं रहेंगे. उन्हें भरोसा है कि बैंकों के विलय का सरकार का बैंकों के एकीकरण के अगले पड़ाव में मददगार बनेगा.