सरिता विशेष

वाहन कारखानों के काम को महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं समझा जाता था. लेकिन बदलते समय के साथ इस क्षेत्र में भी महिलाएं अपना दखल बढ़ा रही हैं.

देश की अधिकतर वाहन कंपनियों के कारखानों में महिलाओं की मौजूदगी बढ़ी है. कंपनियां इस काम के लिए उनकी नियुक्ति को प्रोत्साहन दे रही हैं. ट्रक-ट्रैक्टर का उत्पादन करने वाली कंपनियों में भी महिलाओं की उपस्थिति बढ़ी है. दरअसल, भारत में 48% आबादी महिला होने के बावजूद कार्यबल में हिस्सेदारी महज 28.5% ही है.

टाटा मोटर्स ने की थी शुरुआत   

चार साल पहले टाटा मोटर्स ने ‘वीमेन इन ब्लू’ अभियान के तहत सिर्फ पांच महिलाओं के बैच के साथ लड़कियों को कारखानों के कामकाज में प्रवेश देना शुरू किया था. लेकिन 31 जुलाई 2018 तक कंपनी के विभिन्न संयंत्रों में शॉप फ्लोर पर काम करने वाली महिलाओं की संख्या 1,812 है.

ये कंपनियां मौका दे रहीं

टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा (एम एंड एम), आयशर मोटर्स, हीरो मोटोकॉर्प, बजाज ऑटो जैसी देश की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां महिलाओं को रोजगार के बड़े मौके दे रही हैं.

हीरो की मुहिम ‘तेजस्विनी’

हीरो मोटोकॉर्प ने भी शॉप फ्लोर पर महिलाओं की मौजूदगी बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट तेजस्विनी की शुरूआत की है. कंपनी के विभिन्न संयंत्रों में 160 महिलाएं काम कर रही है. बजाज ऑटो ने भी वीमेन ओनली असेंबलिंग लाइन की शुरू की है.

महिंद्रा में तेजी से बढ़ी संख्या

महिंद्रा ने 2016 में 23 महिलाओं को नियुक्त किया जिनकी संख्या अब 380 से ज्यादा है. आयशर मोटर्स की दोपहिया वाहन इकाई रॉयल एनफील्ड में सभी इंजन असेंबलिंग लाइन को करीब 140 महिला कर्मी ही संभालती हैं.