सरिता विशेष

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘‘पद्मावती’’ का विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. बल्कि यह विवाद दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है. उधर संजय लीला भंसाली ने अपनी पूरी टीम पर मीडिया से बात करने पर पाबंदी लगा रखी है. यहां तक कि खुद संजय लीला भंसाली भी मीडिया से बात नहीं करना चाहते. मगर तमाम विवादों को खत्म करने के लिए संजय लीला भंसाली ने एक वीडियो जारी किया है.

इस वीडियो में खुद संजय लीला भंसाली ने दावा किया है कि उनकी फिल्म में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच कोई स्वप्न दृष्य नहीं है. पर अहम सवाल यह है कि यदि संजय लीला भंसाली सच बोल रहे हैं, तो फिर उन्हें मीडिया के सामने आकर खुलकर बात करने से परहेज क्यों है? क्या किसी ने उन्हें चुप रहने की सलाह दे रखी है? मजेदार बात यह है कि भंसाली की तरफ से हर दिन इस विवाद में घी डालने का ही काम किया जा रहा है. बुधवार को वीडियो जारी करने के साथ ही फिल्म ‘‘पद्मावती’’ का नया पोस्टर जारी किया गया है, जिसमें फिल्म के प्रदर्शन की तारीख 30 नवंबर लिखी हुई है, जबकि फिल्म एक दिसंबर को प्रदर्शित करने की बात की जा रही थी.

विवाद को भुनाने का प्रयास या..

सूत्रों के अनुसार बौलीवुड का एक तबका मान रहा है कि संजय लीला भंसाली अपनी फिल्म को विवादों में रखकर इसकी सफलता को सुनिश्चित करना चाहते हैं क्योंकि इस फिल्म का बजट डेढ़ सौ करोड़ से भी ज्यादा है. बौलीवुड के अंदरूनी सूत्र दावा कर रहे हैं कि ‘पद्मावती’ इतने बड़े बजट को बाक्स आफिस से नहीं इकट्ठा कर सकती.

पद्मावती के विरोध में आए पूर्व राजघराने

इधर बुधवार को ही ‘‘पद्मावती’’ के विरोध में राजस्थान के सभी पूर्व राज घराने भी एक साथ आ गए हैं. बुधवार को जयपुर के सिटी पैलेस में पूर्व राज परिवार की पद्मिनी देवी और भाजपा विधाक दिया कुमारी ने पत्रकारों से बात करते हुए साफ कर दिया कि वह इतिहास से छेड़छाड़ करने वाली फिल्म ‘‘पद्मावती’’ को राजस्थान में प्रदर्शित नहीं होने देंगी.

पद्मिनी देवी ने तो भंसाली पर आरोप लगाया है कि वह अपने वादे से मुकर गए हैं. उनके अनुसार भंसाली ने उनसे वादा किया था कि वह फिल्म बनने के बाद उन्हें दिखाएंगे, उसके बाद ही प्रदर्शन की योजना बनाएंगे. मगर संजय ने अब तक उन्हें फिल्म नहीं दिखायी तथा फिल्म का ट्रेलर व गाना आदि रिलीज कर दिया.

पूर्व राजघराने की सदस्य व भाजपा विधायक दिया कुमारी ने कहा है, ‘‘चित्तौड़ की महारानी पद्मावती और उनके साथ जौहर करने वाली सोलह हजार वीरांगनाओं के शौर्य व साहस से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ करना उनका अपमान है. हम बचपन से ही रानी पद्मावती के शौर्य व बलिदान की कहानियां सुनते हुए बड़े हुए हैं. जहां हजारों औरतों के साथ अस्मिता को बचाने के लिए जौहर किया था. ऐसे में कोई कैसे स्वप्न दृश्य के द्वारा प्रेम कथा को बयां कर सकता है.’’

राजस्थान में नहीं होगी प्रदर्शित

उधर राजस्थान के सबसे बड़े फिल्म वितरक राज बंसल ने फिल्म के वितरण अधिकार खरीदने से साफ मना कर दिया है. उनका कहना है कि जब तक संजय लीला भंसाली और राजपूत करणी सेना के बीच का मसला सुलझ नहीं जाता, तब तक वह फिल्म के वितरण के अधिकर नहीं लेंगे और राजस्थान के सिनेमाघरों में फिल्म को प्रदर्शित नहीं करेंगे.

कई राजनेता विरोध में

उमा भारती, गिरिराज किशोर व उज्जैन से भजपा सांसद चिंतामणी मालवीय भी ‘‘पद्मावती’’ के विरोध में आ गए हैं. उमा भारती ने बाकायदा फेसबुक पर एक खुला पत्र लिखा है.

गुजरात चुनाव के बाद क्रिसमस में आएगी ‘‘पद्मावती’’

उधर गुजरात भाजपा के कई नेताओं ने फिल्म को गुजरात चुनाव के बाद प्रदर्शित करने की मांग करते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है. अब संजय लीला भंसाली से जुड़े कुछ सूत्र कह रहे हैं कि हो सकता है कि यह फिल्म गुजरात में चुनाव संपन्न होने के बाद रिलीज की जाए.