सरिता विशेष

फिल्मकार सचिन गुप्ता अपनी चाइल्ड ट्रैफीकिंग पर आधारित फिल्म ‘‘पाखी’’ को ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ द्वारा प्रमाण पत्र देने से इंकार किए जाने से काफी निराश हैं. इसी के चलते अब फिल्म ‘पाखी’ दस अगस्त को सिनेमाघरों में नहीं पहुंच पाएगी. सूत्रों के अनुसार फिल्म ‘‘पाखी’ ’को ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ की परीक्षण समिति ने देखने के बाद टिप्पणी की है-‘‘यह फिल्म बाल तस्करी और यौन शोषण के इर्द गिर्द घूमती है. पर फिल्म में इस विषय को बहुत ही अपरिष्कृत तरीके से दिखाया गया है.

चाइल्ड ट्रैफीकिंग पर आधारित फिल्म ‘‘पाखी’’ की कहानी के केंद्र में 10 साल की लड़की पिहू की सत्य घटना है, जिसकी शादी एक 60 वर्ष के बूढ़े के साथ होती है और फिर उसे देह व्यापार के लिए बेच दिया जाता है. यह फिल्म मानव तस्करी के व्यापार की दुनिया की हकीकत सामने लाती है. स्वतंत्रता के 73 वर्षों के बाद भी विवाह की आड़ में लड़कियों का व्यापार किया जा रहा है.

बचपन की मासूमियत और स्कूल जाने की उम्र में बाल तस्करी के जरिए वेश्यावृत्ति की अंधेरी गुफा में कम उम्र की लड़कियां लगातार फंस रही हैं. पाखी को उसके प्रेमी ने यौन व्यापार में फंसा दिया है. वह खुद को वेश्यावृत्ति की अंधेरे गुफा में पाती है.

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा फिल्म को प्रमाण पत्र देने से इंकार किए जाने पर फिल्म के निर्देशक सचिन गुप्ता कहते हैं-‘‘सामाजिक अपराध पर आधारित फिल्म को प्रमाण पत्र देने से इंकार करने का सेंसर बोर्ड का निर्णय चौंकाने वाला है. फिल्म में हिंसा या अपमानजनक भाषा भी नहीं है. जबकि इससे पहले भी तमाम सामाजिक अपराध के विषय पर आधारित फिल्मों को सेंसर बोर्ड प्रमाण पत्र देता रहा है. फिलहाल हमने सेंसर बोर्ड की पुनः परीक्षण समिति के सामने इसे पास करने का आवेदन किया है.’’