सरिता विशेष

वुमन ट्रैफिकिंग पर आधारित और विश्व के कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में पुरस्कृत फिल्म ‘‘लव सोनिया’’ में सेक्स रैकेट में फंसी 14 साल की लड़की प्रीति का किरदार निभाकर चर्चा बटोर रहीं अभिनेत्री रिया सिसोदिया कभी भी अभिनेत्री नही बनना चाहती थीं. पर इस फिल्म की पटकथा ने उन्हें अभिनेत्री बना दिया.

खुद रिया सिसोदिया बताती हैं- ‘‘मैं मुंबई के एक कौलेज में बीकाम की पढ़ाई के साथ साथ मौडिंलंग कर रही थीं और बुहत खुश थीं. अभिनय करने का मेरा मन नहीं था. सच कह रही हूं अभिनय में मेरी कभी कोई रूचि नहीं थी. लेकिन एक विज्ञापन फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर के कहने पर मैंने ‘लव सोनिया’के लिए औडीशन दे दिया. पर औडीशन देने के बाद भी मन में ख्याल आया कि फिल्म में अभिनय नहीं करना चाहिए. पर जब मैंने फिल्म की पटकथा पढ़ी, तो मेरा निर्णय बदल गया. पटकथा पढ़ते पढ़ते मेरी आंखें व मेरा चेहरा एकदम लाल हो गया था. उस वक्त मेरी छोटी बहन भी मेरे साथ बैठी थी. मेरे अंदर से सवाल आया कि यदि मेरी छोटी बहन के साथ ऐसा कुछ हो जाए, जैसा फिल्म में प्रीति के साथ हो रहा है, तो मैं क्या करूंगी? इसी ख्याल ने मुझे इस फिल्म को करने के लिए प्रेरित किया. ’’

रिया सिसोदिया आगे कहती हैं- ‘‘पटकथा पढ़ने के बाद दो बातों ने मुझे फिल्म करने के लिए उकसाया. पहला तो दो बहनों का आपसी प्यार और दूसरा 16 साल की लड़की के साथ जबरन जो कुछ होता है. आपको शायद पता होगा कि पूरे विश्व में वुमन ट्रैफिकिंग और सेक्स रैकेट का अरबों रूपए का धंधा हर साल होता है. एक आंकड़े के अनुसार सिर्फ भारत में हर वर्ष 270 लड़कियां जबरन सेक्स के धंधे में ढ़केली जाती हैं. पटकथा पढ़ने के बाद मेरे दिमाग में ख्याल आया कि यदि इनमें मेरी बहन भी हो तो? इसलिए मैंने सोचा कि जो पटकथा पढ़कर मैंनें अहसास किया, वह फिल्म देखकर हर इंसान अहसास करे और इस अनैतिक व्यापार पर रोक लगाने की दिशा में सोचे.’’

फिल्म ‘‘लव सोनिया’’ में रिया सिसोदिया ने एक किसान की 14 साल की लड़की का किरदार निभाया है, जिसे धोखे से सेक्स के धंधे में ढ़केल दिया जाता है. इस किरदार को निभाने से पहले रिया सिसोदिया व मृणाल ठाकुर कलकत्ता की सोनागाची देह मंडी जाकर कई लड़कियों से मिलें और उनकी दर्द नाक कहानी सुनी. जिससे उन्हें अपने किरदार को निभाने में आसानी हुई. वह कहती हैं- ‘‘उन लड़कियों की दुःखभरी कहानी सुनकर हमें रोना आया. अब मेरा कलकत्ता जाने का मन नहीं होता है. मेरे दिमाग में अभी भी उन लड़कियों की कहानियां गूंजती हैं. 15 साल की लड़की बता रही थी कि उसके साथ क्या क्या हुआ? किस तरह के ग्राहक आते हैं? उसे हर दिन कम से कम चालिस पुरुषों के साथ सोना पड़ता है.’’

आपने उन लड़कियों से बात की. अब वह क्या महसूस करती हैं? इस सवाल पर रिया सिसोदिया ने बताया- ‘‘सोनागाची की वेश्या मंडी की लड़कियों ने उसी को अपनी जिंदगी व अपनी तकदीर मान लिया है. अब वह वहां से निकलना नहीं चाहतीं. अब उनके परिवार के लोग उन्हें स्वीकार नहीं करना चाहते. कुछ लड़कियां भागकर अपने माता पिता के पास गयी थीं, पर उनके माता पिता ने कह दिया कि वह तो उनके लिए मर गयी. 2 लड़कियों ने बताया कि उन्होंने भाग कर शादी कर ली थी, पर कुछ समय बाद वह पुरुष भी उन्हें यहीं पर बेच गए, वह सभी एक ही बात कर रही थीं, अब तो हम मैले हो चुके हैं, हमारा अपना कोई नहीं.’’

फिल्म में इस समस्या का कोई समाधान बताया गया? इस सवाल पर रिया ने कहा- ‘‘फिल्म का मकसद लोगों के बीच जागरूकता लाना है. वैसे हमारे देश में कई एनजीओ इस दिशा में काम कर रहे हैं. इन एनजीओ ने कई लड़कियों को बचाकर उन्हें जीवन की नई राह पर अग्रसर किया है. हमारी फिल्म के निर्देशक तबरेज नूरानी ने खुद कुछ लड़कियों को बचाया और उन्हें शरण दिलायी. फिल्म में राज कुमार राव का जो किरदार है, वह वास्तव में फिल्म के निर्देशक तबरेज नूरानी से ही प्रेरित है. इतना ही नहीं रिचा चड्ढा ने भी 15 लड़कियों की मदद की. रिचा तो ऐसी लड़कियों की मदद के लिए एनजीओ खोलने वाली हैं. पर सौ में से मुश्किल से दो लोग ऐसी लड़कियों की मदद के लिए आगे आते हैं. हमारी फिल्म ‘लव सोनिया’ का मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा लोग आगे आएं और इन्हें बचाने के लिए कुछ करें.’’

फिल्म को कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समोरोहों में पुरस्कृत किया गया. आप खुद वहां गयी थीं? इस सवाल पर रिया ने कहा-‘‘जी हां! हम गए थे. पहली ही फिल्म के लिए तमाम विदेशी फिल्मकारों के सामने खड़े होना ही अपने आप में काफी गर्व का अहसास दिला रहा था. एक इंसान ने मुझसे कहा कि उसने दो बच्चों को एडाप्ट किया है. पर अब वह एक सेक्स रैकेट से मुक्त करायी गयी लड़की को एडाप्ट कर उसे नई जिंदगी, नया नाम व नया परिवार देगा. एक औरत ने कहा कि वह अंदर से काफी दुःखी हो गयी हैं और कुछ कह नहीं सकतीं. कुछ लोगों ने सवाल किया कि आप तो मार्डन लड़की लग रही हो, पर फिल्म में आप गांव की लड़की के किरदार में थी, इसलिए वह हमें पहचान नहीं पाए. उन्होंने पूछा कि आपने गांव की लड़की का किरदार कैसे निभाया? पर ऐसे लोगों को मेरी बगल में खड़ी रिचा चड्ढा ने जवाब देते हुए कहा कि किताब को उसके कवर से जज नहीं करना चाहिए. मैंने कहा कि हम वह लड़कियां नही है. हम कलाकार हैं. हमने उन लड़कियों का किरदार निभाया है. कई लोग सवाल कर रहे थे कि ऐसी लड़कियों को बचाने में वह किस तरह से मदद कर सकते हैं? हमें लगा कि इससे लोगों को जागरूक करने का हमारा मकसद कामयाब हुआ.’’