20 वर्षीय मेडिकल की छात्रा और अब ‘मिस वर्ल्ड 2017’ मानुषी छिल्लर को कभी लगा नहीं था कि उन्हें इतना बड़ा खिताब मिलेगा. मानुषी ये खिताब जीतने वाली छठी भारतीय सुंदरी हैं. स्वभाव से हंसमुख मानुषी से मिलना एक इवेंट के दौरान हुआ था, जब वह हरियाणा से ‘मिस इंडिया हरियाणा’ बनकर मुंबई आई थी.

वह अपनी उपलब्धि से बहुत खुश नजर आ रही थीं. उनसे मिलकर बातचीत में वह हमेशा हंसती ही रही.

अपने बारे में वह बताती हैं कि मैं डाक्टर परिवार से हूं. मेरे माता-पिता दिल्ली में रहते हैं और मैं हरियाणा में रहती हूं. मेरा जन्म हरियाणा में हुआ है, लेकिन शुरुआती शिक्षा दिल्ली में हुई और मेडिकल की पढाई मैं फिर से हरियाणा से कर रही हूं. मेरा बचपन से सपना था कि मैं मिस इंडिया बनूं, लेकिन कब ये कैसे असल में परिवर्तित हो गया, पता ही नहीं चला. जब ‘मिस इंडिया’ का खिताब हरियाणा से मिला, तो खुद पर यकीन नहीं हो रहा था. मैंने कुचिपुड़ी नृत्य सीखा है. नेशनल स्कूल औफ ड्रामा का भी हिस्सा रह चुकी हूं. मिस वर्ल्ड बनने के लिए मैंने बहुत मेहनत की है. मेरी इस मेहनत में मेरे माता पिता ने हमेशा साथ दिया है.

वह आगे कहती हैं कि मिस इंडिया एक पर्सनलिटी कांटेस्ट है. अपनी सुंदरता से अधिक बाकी चीजों पर ध्यान देने की जरुरत होती है. जैसे अपने सामान्य ज्ञान को मजबूत करना, फिटनेस को बढ़ाना, जिसमें केवल पतला होना ही नहीं बल्कि अपनी स्ट्रेंथ को बढ़ाना है. इसके अलावा बातचीत का ढंग, सबसे मिलना आदि कई चीजें हैं, जिससे बेहतर करना जरूरी होता है.

कितना प्रेशर मानुषी पर रहा? पूछे जाने पर मानुषी बताती हैं कि इसमें मैंने अपने ऊपर कोई दबाव नहीं लिया, हालांकि परिवार और आयोजकों की मुझसे बहुत आशा थी और होना भी चाहिए, क्योंकि ये वन टाइम अचीवमेंट है और प्रतियोगिता काफी कठिन होती है. सब अच्छे है, ऐसे में मिस वर्ल्ड को जितना आसान नहीं होता. मिस इंडिया की सबसे अच्छी बात ये होती है कि वहां जिस तरह से सबकी ग्रूमिंग की जाती है, वे सबसे काफी जुड़े रहते है जिससे तनाव और डर दोनों निकल जाता है.

मिस वर्ल्ड के बाद क्या करना चाहेंगी? क्या बौलीवुड में आने की इच्छा है? इस बारे में मानुषी कहती हैं कि मैं मेडिकल की छात्रा हूं, मिस इंडिया में आने का अर्थ मेरे लिए ये नहीं कि में बौलीवुड में आना चाहती हूं. इसमें मैं दुनिया की सोच को बदलना चाहती हूं. जिसमें खास कर ‘प्रोजेक्ट शक्ति’ के साथ कर रही हूं. इसमें मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता पर अधिक महत्व देना चाहती हूं. इसके लिये मैं कई गांवों में घूमी, उन्हें स्वच्छता से परिचय करवाकर उनका इलाज भी करवाया है.

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