हिंदी फिल्म ‘दृश्यम’ से अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री इशिता दत्ता झारखण्ड के जमशेदपुर की हैं. फिल्मों में आने की प्रेरणा उन्हें उनकी बहन और अभिनेत्री तनुश्री दत्ता से मिली. स्वभाव से हंसमुख और नम्र इशिता ने हिंदी फिल्मों के अलावा तेलगू और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया है. इसके अलावा उन्होंने कई हिंदी धारावाहिकों में भी काम किया है.

काम के दौरान इशिता अभिनेता वत्सल सेठ से मिलीं और शादी की. अभी इशिता फिल्म ‘लस्टम पस्टम’ में मुख्य भूमिका निभा रही हैं. उनसे बात करना रोचक था पेश है कुछ अंश.

इस फिल्म को करने की खास वजह बताएं, आप कितनी उत्साहित हैं?

इसे करते हुए दो साल बीत गए हैं. मुझे इसकी कहानी सुनते ही पसंद आ गयी थी और उसी दिन स्क्रीन टेस्ट भी हो गया था. इसमें मैं एक यंग मदर की भूमिका निभा रही हूं. ये किरदार सबसे अलग था और मैं हर फिल्म में अलग-अलग भूमिका निभाना चाहती हूं, ताकि मैं ग्रो कर सकूं.

क्या इस तरह की यंग मदर की भूमिका निभाने से आपको टाइपकास्ट होने का डर नहीं?

मुझे ऐसा नहीं लगता, पहली फिल्म में मैंने एक बेटी की भूमिका निभाई थी, तो काफी लोगों ने मुझे कहा था कि आप ग्लैमरस रोल छोड़कर ऐसी भूमिका क्यों कर रही हो, पर मुझे कोई ऐतराज नहीं था. मेरे लिए प्रोजेक्ट और चरित्र काफी माइने रखता है. उससे मैं कितना सीखूंगी, इसे मैं देखती हूं. आजकल सबकुछ बदल रहा है. मेरी भूमिकाएं भी बदली है. आगे मैं एक फिल्म में पुलिस की भूमिका निभा रही हूं.

फिल्मों में आने की प्रेरणा कहां से मिली?

मुझे प्रेरणा अपनी बहन तनुश्री से मिली. मैं पढ़ाई के लिए मुंबई आई थी और उसी दौरान मौडलिंग, निर्देशक और कौस्टयूम डिजाइनर का काम करती रही. तब पता नहीं था कि मैं फिल्मों में काम करुंगी, लेकिन तनुश्री को लग रहा था कि मैं अभिनय कर सकती हूं. मुझे थोडा डर था, क्योंकि हमारे परिवार में दीदी के अलावा कोई भी फिल्म इंडस्ट्री से नहीं था. इसलिए सफलता मिलेगी या नहीं ये मन में था, लेकिन दीदी ने मुझे समझाया कि मैं कोशिश कर सकती हूं, ताकि बाद में कोई रिग्रेट मेरी जिंदगी में न रह जाय. मैंने कोशिश की, फिल्में व टीवी सिरियल्स मिलें और आज मैं खुश हूं.

क्या आउटसाइडर को काम मिलना मुश्किल होता है?

संघर्ष सभी को करना पड़ता है. मेरे लिए उतना नहीं था, क्योंकि मेरी बहन यहां काम कर रही थी. इसलिए रहने की जगह, वित्तीय सहायता, सही गाइडेंस सब दीदी से मिला. ये सही है कि आउटसाइडर को अच्छा काम मिलना मुश्किल होता है.

छोटे शहर से बड़े शहर में आकर काम करना कितना मुश्किल था?

मुश्किल होता है, क्योंकि कल्चर में बहुत अधिक विभिन्नता होती है, लेकिन बड़े शहर में काम करने की बहुत अधिक सहूलियत होती है. आजकल तो ये बहुत ट्रांसपेरेंट हो गया है. हर किसी को काम मिलता है. काम बहुत है और आज के यूथ के लिए अच्छा समय है.

रिजेक्शन को आप कैसे लेती हैं?

रिजेक्शन रोज होता है. जिस दिन मुझे लिया गया, उस दिन भी रिजेक्शन हुए ही होंगे. ऐसा मैं सोचती हूं और समस्या नहीं होती. कभी-कभी बुरा लगता है.

आपके जीवन का टर्निंग प्वाइंट क्या था?

धारावाहिक ‘एक घर बनाऊंगा’ मेरे जीवन की खास शो था, उसे करने के बाद मैंने बहुत कुछ सीखा था. फिल्मों की अगर बात करें, तो फिल्म ‘दृश्यम’ से मेरी पहचान हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बनी.

फिल्मों में अन्तरंग दृश्य के लिए आप कितनी सहज होती हैं?

अगर कहानी की मांग हो, तो करने में कोई बुराई नहीं. आजकल कई ऐसे शाट्स इस तरह शूट किये जाते है कि वे नेचुरल लगते है. मैंने अपना कोई दायरा नहीं बनाया है. जैसी कहानी आती है, उसी हिसाब से मैं अपने आपको तैयार कर लेती हूं.

कास्टिंग काउच का कभी सामना करना पड़ा?

मुझे कभी नहीं करना पड़ा, पर मैं जानती हूं कि इंडस्ट्री में ये होता है. मैं उन युवाओं को जो इंडस्ट्री में आकर कुछ करना चाहते हैं, उनसे ये कहना चाहती हूं कि यहां कुछ भी शार्टकट नहीं होता. अगर आप प्रतिभावान हैं, तो आपको काम अवश्य मिलेगा.

आपके यहां तक पहुंचने में परिवार का सहयोग कितना रहा है?

परिवार में सभी इंजिनियर और डाक्टर हैं. इसके बावजूद हमें अपने मन के अनुसार काम करने की पूरी आजादी मिली है और मेरे पति वत्सल सेठ भी बहुत सहयोग देते हैं. उनके लिए मेरा काम काफी महत्व रखता है. मैं चाहती थी कि मेरा पति मेरे काम को समझने वाला हो और वे ऐसे ही हैं. पति ही नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार मेरे काम को सम्मान देता है.

आपका ड्रीम प्रोजेक्ट क्या है?

मुझे निगेटिव भूमिका निभाने की इच्छा है. काजोल और प्रियंका चोपड़ा की नकारात्मक भूमिका मुझे बहुत पसंद है. निर्देशक इम्तियाज अली और आर माधवन के साथ काम करने की इच्छा है.

कितनी फैशनेबल और फूडी हैं?

मेरे लिए फैशन आरामदायक कपड़े का होना है. जींस और टी शर्ट मुझे बहुत पसंद है. मुझे इंडियन ड्रेस पहनना बहुत पसंद है. साड़ी और सूट्स मैं अधिकतर पहनती हूं. मुझे खाने में थोड़ी परहेज करना पड़ता है, पर मुझे स्वादिष्ट भोजन पसंद है. मुझे खाना बनाना आता है. मेरे पति गुजराती हैं, उनके लिए मैंने ढोकला बनाना सीखा है.

अभी जिंदगी कितनी बदली है?

फिल्मों में आने के बाद जिंदगी काफी बदली है. ये ग्लैमर वर्ल्ड है. जब लोग मेरे अभिनय की तारीफ करते हैं, तो बहुत खुशी मिलती है. मैं सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहने लगी हूं.

महिलाओं के साथ अत्याचार और रेप की घटनाएं आम हो चली है, इसके लिए आप किसे जिम्मेदार मानती हैं?

कानून का ढीलापन ही इसे बढ़ावा देता है. किसी को कानून का डर नहीं. हमारे देश में सख्त कानून व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि 2 साल 3 साल की बच्चियों के साथ रेप करने से वे डरे. अपराधी की रूह कापें. रेप ही नहीं ‘ईवटीजिंग’ पर भी कानून मजबूत होना चाहिए. इसके अलावा स्कूल में इस बारें में बातचीत करना जरुरी है.