लगभग तीन साल से दीपिका पादुकोण कलाकारों की पारिश्रमिक राशि के मुद्दे पर खुलकर बोलती आयी हैं. उनका मानना रहा है कि हर फिल्म में महिला कलाकारों को भी पुरूष कलाकारों के समकक्ष हर फिल्म में पारिश्रमिक राशि मिलनी चाहिए.

यही वजह है कि जब दीपिका पादुकोण ने शाहिद कपूर व रणवीर सिंह के साथ संजय लीला भंसाली की अतिमहत्वाकांक्षी फिल्म ‘पद्मावती’ में अभिनय करना शुरू किया था, तभी से बौलीवुड में चर्चाएं गर्म रही हैं कि फिल्म ‘पद्मावती’ में दीपिका पादुकोण को शाहिद कपूर और रणवीर सिंह के मुकाबले ज्यादा पारिश्रमिक राशि दी गयी है.

मगर तब से अब तक पारिश्रमिक राशि की इस चर्चा को लेकर शाहिद कपूर, रणवीर सिंह और खुद दीपिका पादुकोण बचने का प्रयास करते रही हैं. अब तक किसी ने भी इस मुद्दे पर चुप्पी नहीं तोड़ी.

पर जब फिल्म ‘पद्मावती’ के थ्री डी ट्रेलर लांच के अवसर पर दीपिका पादुकोण फिल्म की युनिट के सभी सदस्यों के साथ पत्रकारों के सामने पहुंची, तो पत्रकारों ने दीपिका पादुकोण से सीधा सवाल पूछ लिया कि इन चर्चाओं में कितना दम है कि उन्हें ‘पद्मावती’ में दूसरे कलाकारों की बनिस्बत सर्वाधिक पारिश्रमिक राशि मिली है?

इस पर दीपिका पादुकोण ने स्पष्ट जवाब देने की बजाय गोलमोल जवाब देते हुए कहा- ‘‘मेरी पारिश्रमिक राशि पर बात करना ज्यादा उत्तेजित करने वाला मसला नही है. मुझे जो मिलता है, उसमें मैं सहज हूं, मुझे यकीन है कि जो आपको मिलता है, उसमें आप भी सहज होंगे. लेकिन मैं आपसे कहना चाहती हूं कि मुझे इस बात का गर्व है कि अजीत अंधारे (वायकाम 18 के सीईओ), ने इस तरह की फिल्म में अपना पैसा लगाया है. यह उत्साह बढ़ाने वाली बात है.’’

तो बातों को घुमाना, सवाल का सही जवाब न देने की कला लोगों को दीपिका पादुकोण से सीखनी चाहिए.

Tags: