अंग्रेजी की एक वेबसाइट के अनुसार केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय के अनुरोध पर सीबीआई ने सरकारी संस्थान ‘‘राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम’’ उर्फ एनएफडीसी के खिलाफ प्राथमिक जांच शुरू कर दी है. यह जांच एनएफडीसी द्वारा पिछले सात वर्ष के दौरान धन राशि आवंटन की गड़बड़ियों को लेकर है. इस मामले में सन टीवी, फिल्मकार अनुराग कष्यप और फिल्मकार दिबाकर बनर्जी के खिलाफ भी सीबीआई जांच करेगी. सूत्रों की माने तो सीबीआई ने 23 अक्टूबर को ही एनएफडीसी को पत्र लिखकर इस जांच के बारे में सूचना दे दी थी.

सीबीआई के इस पत्र के अनुसार वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर एनएफडीसी के अलावा ‘सन टीवी’, ‘यूएफओ मूवीज’, ‘अनुराग कष्यप फिल्मस’ के खिलाफ जांच होगी. आरोप है कि एनएफडीसी ने इन कंपनियों को सारे कानून नियमों व कायदों को ताक पर रखकर करोड़ों रूपए दिए.

सीबीआई के पत्र के अनुसार एनएफडीसी ने ‘यूएफओ मूवीज’ को दूसरी कंपनियों की बनिस्बत ज्यादा तवज्जो देते हुए नियमों से ज्यादा भुगतान किया. इतना ही नहीं एनएफडीसी ने अपने ही नियमों को तोड़ते हुए उन चैनल व कंपनियों को विज्ञापन दिए, जिन्हें डीएवीपी ने स्वीकृत नही किया था. सीबीआई के पत्र के अनुसार सन टीवी को 38,41,800 रुपए और यूएफओ मूवीज को 40,13,898 रूपए का ज्यादा भुगतान किया गया. इसी तरह अनुराग कष्यप और दिवाकर बनर्जी को भी बेवजह भुगतान किया गया.

अनुराग कष्यप को 2011 में फिल्म ‘‘दैट गर्ल इन यलो बूट’’ के लिए 62 लाख रुपए और 2013 में फिल्म ‘‘द लंच बाक्स’’ के लिए डेढ़ करोड़ रूपए का एनएफडीसी ने भुगतान किया. दिबाकर बनर्जी के निजी खाते में भी एक बड़ी रकम गलत ढंग से दी गयी.

उधर अनुराग कष्यप और दिबाकर बनर्जी ने एक वेब साइट से बात करते हुए सारे आरोपों को बेबुनियाद बताया है. एनएफडीसी पर लगे इन आरोपों के केंद्र में ‘एनएफडीसी’ चीफ नीना लाथ गुप्ता हैं, जो कि इस पद पर 2006 यानी कि 12 वर्ष से काबिज हैं. इन्हें इस वर्ष फरवरी माह में तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया था. पर दो माह बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर वह पुनः अपने पद पर काबिज हो गयी थीं. फिर मई माह में सूचना प्रसारण मंत्रालय ने उन्हे बर्खास्त किया.

ज्ञातव्य है कि भारत सरकार ने 1975 में भारत में फिल्म उद्योग को विकसित करने के मकसद से एनएफडीसी का गठन किया था. एनएफडीसी ने कुछ थिएटर बनवाए. कुछ फिल्मकारों को धन देकर अब तक 300 फिल्मों का निर्माण करवाया. हर वर्ष भारत में आयोजित होने वाले ‘अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव’ में भी एनएफडीसी ही आगे रहता है. एनएफडीसी ही ‘इफी’ में फिल्म बाजार का आयोजन करता है, जिसमें पिछले दस वर्षों से अनुराग कष्यप व दिबाकर बनर्जी का ग्रुप ही हावी रहा है.

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