सरिता विशेष

मनोज बाजपेयी किस पर लगाम चाहते हैं?

मशहूर अभिनेता मनोज बाजपेयी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर सोशल मीडिया में जो कुछ हो रहा है, उसे सही नहीं मानते. वह कहते हैं-‘‘इन दिनों हर विषय पर बात होती है. आप सोशल मीडिया पर चले जाइए. आपको देश से जुडे़ तमाम मुद्दों पर बकवास देखने को मिलेगी. आज की तारीख में बातें इतनी हो रही हैं कि आप कल्पना नहीं कर सकते. जिसको जिसकी बात पसंद नहीं आती है, वह उसे गरिया भी रहा है. धमकी भी दे रहा है. पता नहीं क्या क्या कर रहा है? हां! जिस पर सबसे ज्यादा बात होनी चाहिए, वह है‘-बोलने की आजादी’.

अफसोस की बात है कि सोशल मीडिया की वजह से हमारे बोलने की आजादी पर सवाल उठ रहे हैं? आज कोई भी बेरोजगार आदमी अपने घर पर बैठकर यदि थोड़ा भी काम करने की कोशिश कर रहा हैं, तो दूसरी तरफ एक आलसी आदमी जो कुछ काम नहीं करना चाहता, वह हाथ में मोबाइल लेकर ट्वीटर पर उसी को गरिया देता है, उसे धमका देता है. मजेदार बात यह है कि यह गरियाने वाला, दूसरों को गाली देनेवाला, दूसरों को धमकाने वाला इंसान बच भी जाता है. सबसे पहले आजादी के अवसर पर इस पर लगाम लगाने की जरूरत है.’’

कुबरा के अनुसार कब सही आजादी मिलेगी?

‘रेडी’, ‘सुल्तान’, ‘जोड़ी ब्रेकर’ सहित कई फिल्मों में छोटे छोटे किरदार निभाने के बाद नेटफ्ल्क्सि पर प्रसारित वेब सीरीज ‘‘सेक्रेड गेम्स’’ में ‘फ्रंट न्यूडिटी’ का दृश्य अंजाम देकर चर्चा बटोर रही अभिनेत्री कुबरा सेठ के अनुसार हम असली आजादी से काफी दूर हैं.

वह कहती हैं-‘‘हम आगे बढ़ रहे हैं. हम सीख रहे हैं. हम गिर कर संभल रहे हैं. पर हम आजाद नहीं है. हम अपने दिमाग की बाधाओं में ही उलझे हुए हैं. जब हम एक दूसरे की इज्जत करेंगे, मान सम्मान करेंगे, तो ही हमारा देश आगे बढे़गा. जब लोग अपनी जेंबे भरना बंद करेंगें, तब देश आगे बढ़ेगा. जब हम सब एक दूसरे से प्यार करेंगे, एक दूसरे से मर्यादित भाषा में बात करेंगे, तो देश उन्नति करेगा. जब हम उटपटांग बकवास करना बंद करेंगे, जब हम लोगों के दिलों के साथ खेलना बंद करेंगें, तब हम सही मायने में आजादी पाएंगे. यह बहाना गलत है कि हमारे देश की आबादी बहुत है. चीन की आबादी हमारे देश से ज्यादा है, फिर भी वह चीन हमसे ज्यादा प्रगतिशील है.’’

राजनीति में भ्रष्टाचार खत्म होने पर ही आजादी है : सोनाक्षी सिन्हा

आजादी की 71वीं वर्षगांठ की चर्चा करते हुए सोनाक्षी सिन्हा कहती हैं-‘‘हमने अब तक बहुत कुछ पाया है, काफी कुछ किया है. पर अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है. आज की तारीख में लोग इतने समझदार हो गए हैं कि हर किसी के पास अपने देश को बेहतर बनाने को लेकर कोई न कोई नयी आइडिया कोई न कोई सुझाव है. मेरी राय में यदि हर किसी को मौका दिया जाए तो बहुत कुछ हो सकता है.

सबसे पहली जरूरत है राजनीति में सफाई हो. सबसे ज्यादा गंदगी वहीं हैं. दूसरा भ्रष्टाचार खत्म होना चाहिए. स्वच्छता अभियान तेजी से बढ़ना चाहिए. हमारे प्रधानमंत्री ने स्वच्छता अभियान शुरू तो किया है, पर उस पर अमल नहीं हो रहा है. अब तक बहुत कुछ बदलाव आना चाहिए था, पर हम जिस तरह से इंटरनेट पर गंदगी की तस्वीरें देखते हैं, उससे हमारा सर शर्म से झुक जाता है. यह बहुत दुःखद है कि आज भी हर जगह प्लास्टिक व अन्य गंदगी मौजूद है. ’’