सरिता विशेष

चिल्ड्रेन्स आफ हैवेन’, कलर आफ पैराडाइज, बरन, सांग आफ स्पैरोज और मोहम्मद: द मैसेंजर आफ गाड जैसी ईरानियन फिल्मों के सर्जक और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निर्देशक माजिद मजीदी इन दिनों अपनी 20 अप्रैल को ईरान व भारत सहित विश्व के 34 देशों में एक साथ प्रदर्शित हो रही फिल्म ‘‘बियांड द क्लाउड्स’’ को लेकर चर्चा में हैं. माजिद मजीदी के करियर की पहली फिल्म है, जिसे उन्होंने अपने वतन ईरान से इतर देश भारत में बनाया है. माजिद मजीदी को इस बात का दुःख सताता रहा है कि भारतीय फिल्मकार भारतीय सभ्यता संस्कृति व भारतीय कहानियों से इतर कहानियों पर ही फिल्में क्यों बनाते हैं. ऐसे में उनका भारत आकर फिल्म बनाना अपने आप में एक नए इतिहास का सूत्रपात है. इस नए इतिहास का सूत्रपात भारतीय फिल्म प्रोडक्शन कंपनी ‘‘नमः पिक्चर्स’’ के किशोर अरोड़ा व शरीन मंत्री केड़िया के ही प्रयासों से हो पाया.

अपने इस प्रयास से अति उत्साहित मेरठ निवासी किशोर अरोड़ा कहते हैं- ‘‘हम दुनिया भर के सिनेमा प्रेमियों को बताना चाहते हैं कि भारत में असंख्य रंगों में निहित और जड़ित सम्मोहक कहानियां हैं, जिन्हें हम सुनाते हैं. आस्कर नामित ईरानी लेखक व निर्देशक माजिद मजीदी द्वारा निर्देशित हमारी पहली फिल्म ‘बियांड द क्लाउड्स’ उसी दिशा में पहला कदम हैं. जी स्टूडियोज और नमः पिक्चर्स द्वारा निर्मित ईरानी फिल्मकार माजिद मजीदी के जादू को हम अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘नमः पिक्चर्स’ के माध्यम से भारत लेकर आए हैं.’’

मजेदार बात यह है किशोर अरोड़ा का माजिद मजीदी से पहले से कोई परिचय नहीं था. पर माजिद मजीदी की फिल्म ‘‘चिल्ड्रेन्स आफ हैवेन’’ देखकर किशोर अरोड़ा ने जब फिल्म के संबंध में जानकारी हासिल की, तो उन्हें इस बात का गम हुआ कि वह सिनेमा के भगवान को नहीं जानते हैं. खुद किशोर अरोड़ा कहते हैं- ‘‘मुझे फिल्में देखने का शौक है.

हम हर दिन कोई न कोई एक विदेशी फिल्म देखते रहते हैं. लगभग नौ वर्ष पहले हमने एक दिन ‘चिल्ड्रेन्स आफ हैवेन’ देखी. फिल्म देखकर मैं बहुत प्रभावित हुआ और मुझे लगा कि मुझे इसका रीमेक भारत में बनाना चाहिए. इसलिए हमने पता किया कि फिल्म के निर्माता निर्देशक कौन हैं. तो हमें माजिद मजीदी के बारे में पता चला. पता चला कि वह तो सिनेमा के भगवान हैं. फिर हमने उनसे संपर्क किया. पर पता चला कि उनकी इस फिल्म का रीमेक बौलीवुड में हो चुका है. पर हमारे बीच बातचीत होती रही. एक दिन हमने उनके सामने भारत आकर फिल्म बनाने का आफर रख दिया. उस वक्त वह अपनी फिल्म ‘मोहम्मदः द मैसेंजर आफ गाड’ में व्यस्त थे. फोन पर लंबी बात हुई और यह तय हुआ कि वह भारत आकर आमने सामने बैठकर बात करेंगे. जब वह भारत आए और हमारे बीच लंबी बात हुई, तो उस वक्त उन्होंने कहा कि वह तो अपनी फिल्म ‘मोहम्मदः मैसेंजर आफ गाड’ में व्यस्त हैं, इसलिए अभी भारत आकर फिल्म नहीं बना सकते. हमने उनसे साफ साफ कहा कि हम तो उनका इंतजार करने के लिए तैयार हैं, पर हम उनके साथ भारत में फिल्म बनाना चाहते हैं. अब पूरे आठ वर्ष बाद हम माजिद मजीदी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘‘बियांड द क्लाउड्स’’  20 अप्रैल को सिनेमाघरों में लेकर आ रहे हैं. यह पहली भारतीय फिल्म होगी, जो कि ईरान में भी प्रदर्शित होगी. इसके अलावा विश्व के 34 अन्य देशों में प्रदर्शित होगी.’’

पर आप दोनों एक दूसरे की भाषा से अनभिज्ञ हैं. ऐसे में किस तरह की समस्याएं आयीं? इस सवाल पर किशोर अरोड़ा ने कहा- ‘‘यदि आपने माजिद मजीदी की फिल्में देखी होंगी, तो पाया होगा कि माजिद मजीदी की फिल्मों में पात्रों के बीच संवाद कम होते हैं. हर पात्र अपने चेहरे के भाव से ज्यादा बातें करते हैं. इसलिए हमें लगा कि ऐसा भारत में भी हो पाएगा. पहले हमने अंग्रेजी भाषा में फिल्म बनाने की सोची थी. मगर माजिद मजीदी जब भारत आएं, तो उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी जिनके बारे में हैं, वह अंग्रेजी जानते नहीं हैं. वह तो हिंदी जानते हैं. इसलिए फिल्म हिंदी में बननी चाहिए. तो मुझे भी लगा कि हमें हिंदी में फिल्म बनानी चाहिए. आखिर हम अपने देश के लिए फिल्म बना रहे हैं.’’

हिंदी भाषा की फिल्म “बियांड द क्लाउड्स’’ का नाम अंग्रेजी में रखने पर सफाई देते हुए किशोर अरोड़ा कहते हैं- ‘‘देखिए, हम अपनी फिल्म को पूरे विश्व में प्रदर्शित कर रहे हैं. तो हमने फिल्म का नाम ऐसा रखा है, जिसे हर देश का दर्शक समझ सके. पर हमने कोई सख्त या कठिन अंग्रेजी नाम नहीं रखा. यह एक युनिवर्सल फिल्म है.’’

फिल्म की कहानी माजिद मजीदी की ही है. इस बारे में किशोर कहते हैं- ‘‘कहानी मेरी नही है..माजिद मजीदी सर खुद ही लिखी कहानी पर ही फिल्म बनाना पसंद करते हैं. वह एडीटिंग भी करते हैं. उन्हें संगीत व कास्ट्यूम आदि की भी बहुत अच्छी समझ है. उन्हें कैमरा लाइटिंग सब कुछ पता है.’’

तो उन्होंने एक कहानी सुनाई, वही आपको पसंद आ गयी? इस सवाल पर किशोर अरोड़ा व शरीन ने कहा- ‘‘ऐसा नहीं है. हम उनके साथ पहले कश्मीर पर आधारित ‘फ्लोटिंग गार्डेन’ बनाने वाले थे. पर जब उन्होंने हमें ‘बियांड द क्लाउड्स’ की कहानी सुनाई, तो हम दोनों को लगा कि पहले इसे बनाना चाहिए. ‘फ्लोटिंग गार्डेन’ का विषय भी बहुत अच्छा है. उस पर भी काम चल रहा है. भविष्य में माजिद मजीदी के साथ ही हम इसे बनाएंगे. पर माजिद मजीदी को लगा कि मुंबई पर आधारित विषय पर पहले फिल्म बनायी जाए. माजिद मजीदी ने कहानी लिखने से पहले भी काफी भारत भ्रमण व शोध कार्य किया. जब तय हो गया कि मुंबई की कहानी पर फिल्म पहले बनेगी, तो पूरे एक माह तक वह मुंबई के चप्पे चप्पे की यात्रा की. लोकेशन पर उनका शोध काम किया.’’

फिल्म ‘‘बियांड द क्लाउड्स’’ की कहानी की चर्चा चलने पर किशोर ने कहा- ‘‘भाई बहन की कहानी व उनके इमोशन की कहानी है, जो कि भारतीय फिल्मों में नजर नही आता. भारतीय फिल्मों में तो प्रेम कहानी हावी हैं और वह भी नकली. हम भी कुछ नया बनाना चाहते थे.’’

फिल्म ‘बियांड द क्लाउड्स’ की कहानी मुंबई की है. मगर फिल्म में एक घर के दृष्यों की शूटिंग राजस्थान के सांबर में करने की वजह स्पष्ट करते हुए किशोर कहते हैं-‘‘उन्हें जिस तरह का घर चाहिए था, वैसा घर मुंबई में नहीं था. उन्हें चाहिए था कि छोटे छोटे चबूतरे वाला घर हों. गाय बकरी वगैरह बंधी हों. उन्हें चैपाल चाहिए थी. इस तरह के घर उत्तर प्रदेश में मिल सकते थे. पर उन्हें राजस्थान के सांबर में वैसा घर मिला, तो हमने वहां शूटिंग की. वह सेट नहीं लगाना चाहते थे, पर उन्होंने पटकथा में जैसा घर लिखा था, वैसा ही घर तलाश रहे थे. माजिद मजीदी सर ने पूरी फिल्म वास्तविक लोकेशन पर ही फिल्मायी है.’’

अक्सर निर्माता की शिकायत होती है कि निर्देशक की वजह से फिल्म का बजट बढ़ गया? इस सवाल पर किशोर ने कहा- ‘‘भगवान से क्या शिकायत. भगवान हमारे घर आए, यही बड़ी बात है. उसके बाद शिकायत करना तो बहुत बड़ा अपराध होगा. दूसरी बात मैंने पहले ही कहा कि वह एडीटिंग सहित सब कुछ जानते हैं. इसलिए बेवजह किसी सीन के कई टेक भी नहीं लेते थे. बौलीवुड के निर्देशक एक ही सीन को कई एंगल से फिल्माते हैं. उन्होंने ऐसा नहीं किया. उनकी योजना काफी सही रही. पूरी फिल्म 63 दिन में फिल्मायी गयी.’’

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