उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के रहने वाले, मजाकिया हेमंत पांडे 1996 से ही अदाकारी की दुनिया के हो गए थे, लेकिन लोगों ने उन्हें कौमेडी शो ‘औफिसऔफिस’ में उन के द्वारा निभाए गए पांडेजी के किरदार से जाना. इस के बाद ‘कृष’, ‘रहना है तेरे दिल में’ जैसी 2 दर्जन से ज्यादा फिल्मों में उन्होंने हंसी की फुलझडि़यां बिखेरी हैं.

वे अपनी अलगअलग छवियां बनाना चाहते हैं. इसलिए इन दिनों वे कौमेडी से इतर भी कई तरह के रोल करने में खासी रुचि ले रहे हैं. हालांकि वे कौमेडी में इतना रचबस गए हैं कि लोग उन्हें किसी दूसरी छवि में देखने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने ढाई दशकों तक रंगमंच और सिनेमा से जुड़ी कई नामचीन हस्तियों के साथ काम किया है. बावजूद इस के, वे कहते हैं कि जिंदगी की असली लड़ाई तो अब शुरू हुई है.

एक बातचीत में उन्होंने बताया, ‘‘पढ़ाईलिखाई में कमजोर होने की वजह से लड़कियां उन्हें पसंद नहीं करती थीं. लेकिन मैं एक लड़की को पसंद करता था. उस का नाम जानने के लिए मैं आटे की चक्की तक चला गया था. उस के चक्की से लौटने के बाद, मैं वहां गया और रजिस्टर देखा जिस पर उस का नाम लिखा था.’’

हेमंत इतना बताने के बाद जोर से हंस पड़े. थोड़ी देर बाद हंसी रोकते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मैं ने उस लड़की के लिए 64 पेज का लव लैटर लिखा था. मैं ने जब उस के हाथ में 64 पेज दिए तो वह घबरा गई थी. उस ने पूछा, लैटर कहां है? मैं ने कहा, ये सारे पेज लव लैटर ही के तो हैं.’’

हेमंत कहते हैं, ‘‘हास्य अभिनय की शुरुआत मैं ने अपने पड़ोसियों की मिमिक्री से की थी. बचपन की यह शरारत मेरे बहुत काम आई है. मैं आम आदमी से हास्य अभिनय की प्रेरणा लेता हूं. मुझे पोस्टमैन, बैंक मैनेजर, परचून की दुकान का लाला वगैरह सभी अभिनय की प्रेरणा देते हैं.’’ उन का मानना है, ‘‘आज की स्ट्रैस वाली लाइफ में अगर किसी के चेहरे पर उन के कारण हंसी आती है, तो इस से अच्छी बात और क्या होगी.’’

Tags: