ओडिशा के कटक शहर में जन्मी गायिका, संगीतकार, गीतकार और निर्माता सोना महापात्रा एक जानीमानी परफौर्मर हैं. उन्होंने अलबम, संगीत वीडियो, विज्ञापनों के जिंगल्स और 14 भाषाओं में कई फिल्मों के 150 गाने गाए हैं. स्पष्टभाषी और दृढ़प्रतिज्ञ सोना और उन के म्यूजिक डायरैक्टर पति राम संपत ने साथ मिल कर अपना प्रोडक्शन हाउस ‘ओम ग्रोन’ खोला है. उन का शो ‘लाल परी मस्तानी’ रेड एफएम रेडियो का एक आकर्षक शो है. मुंबई के सांताक्रुज इलाके में उन के घर पर उन से मिलना हुआ. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के अंश :

‘लाल परी मस्तानी’ शो से जुड़ने की वजह क्या है?

यह एक रेडियो शो है. जहां गाने बजाए जाते हैं. हर शो में एक थीम महिलाओं की समस्या से जुड़ी हुई होती है और मैं उस पर बातचीत करती हूं. यह एक पुरानी कहानी है जो मुझ से जुड़ी हुई है. मुझे याद आता है एक बार मैं 15 साल पहले दिल्ली गई थी. मैं एक गैस्टहाउस में बैठी थी. वहां कई देशों के ट्रैवलर्स आए हुए थे. वहां एक टूरिस्ट लड़की अफगानिस्तान के बौर्डर साहवान से घूम कर आई थी. उस का कहना था कि वहां पर तालिबानी आतंक के चलते आज गानाबजाना बंद कर दिया गया है. महिलाओं को घर पर रहने को मजबूर कर दिया गया है. सब को बुरका पहना दिया गया है. वहीं एक महिला लाल रंग के कपड़ों में घूमती और गानाबजाना करती है और दरगाह में रहती है.

वहीं से मुझे एक आइडिया आया. मैं ने सोशल मीडिया पर ‘लाल परी मस्तानी’ के नाम से हैंडल भी बनाया है. इस के द्वारा मैं लोगों से जुड़ती हूं, जिस से वे समाज में कुछ अच्छा कर सकें. इस तरह मैं ने ‘लाल परी मस्तानी’ प्रोजैक्ट लौंच किया है, जहां पर मैं हर महीने गाने रिलीज करती हूं और उन के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा करती हूं. सोशल मीडिया पर पहले मीराबाई, फिर अमीर खुसरो और आगे कबीर को लाऊंगी.

इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा कैसे मिली?

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद एमबीए किया, लेकिन घर में कला का माहौल मैं ने बचपन से देखा है. मेरा सपना था कि मैं एक अच्छी परफौर्मर बनूं. मुझे औडियंस के साथ जुड़ने की बहुत तमन्ना थी फिर चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो. स्कूलकालेज में भी कई बार मंच पर गई हूं. मुझ में किसी स्थान की संस्कृति और लोगों के बारे में जानने की बहुत रुचि है. संगीत मेरा पैशन है. मैं ने 9 साल की उम्र से शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू कर दिया था और 3 से 4 गुरुओं से तालीम ली है. लेकिन मुंबई आ कर काम करना आसान नहीं था. मुंबई के बारे में मैं ने बहुतकुछ नकारात्मक बातें सुन रखी थीं. तभी मैं ने उस से हट कर कुछ अलग करने की सोची.

मैं ओडिशा की हूं और कई नई जगहों पर जा चुकी हूं. इसलिए हर जगह के बारे में जानकारी थी. मुंबई आने के बाद मैं ने नौकरी शुरू कर दी. इस के साथसाथ विज्ञापनों के जिंगल्स में काम करने लगी. काम करने से मुझे साथी कर्मियों का मानसिक रूप से बहुत सहयोग मिला. मैं हमेशा से आत्मनिर्भर थी और अब तक वैसी ही हूं.

पहली सफलता कब मिली?

मेरी हमेशा से इच्छा थी कि पहली सफलता मुझे अपने गाने से मिले और ऐसा हुआ भी. मुझे मेरे ही अलबम से कामयाबी मिली. अपनी शर्तों पर मैं ने उसे रिलीज किया था. यहां तक के सफर के बारे में बताएं?

मैं ने कोई फार्मूला नहीं बनाया था. जो जैसे आता गया, मैं करती गई. सब एकसाथ चलता रहा. अलबम बनाने में 2 साल लगे. उस दौरान लोगों से मिली और फिर फिल्मों में गाने गाए. प्रोड्यूसर बनी. ऐसे ही कारवां चलता गया. मेरी कोशिश रहती है कि हर दिन कुछ अच्छा काम करूं. मेरे अंदर जो प्रतिभा है उसे मैं ने बाहर निकालने की कोशिश की है. सिंगिंग, राइटिंग और किसी शो का निर्माण करना, यह सब मेरी मेहनत और लगन से संभव हुआ है. मुझे ये सब पसंद है, इसलिए समय का बंटवारा उसी हिसाब से कर लेती हूं. थकान होती है, पर पैशन की वजह से वह बाहर निकल जाती है.

क्या अब भी आप संघर्षरत हैं?

हां, संघर्ष यह है कि मैं अपनी प्रतिभा को दर्शकों के आगे पूरी तरह से लाना चाहती हूं, लेकिन मैं किसी रैट रेस में भागना नहीं चाहती.

क्या महिला होने की वजह से आगे बढ़ने में संघर्ष अधिक होता है? यह सही है कि आज भी महिलाओं के प्रति लोगों की सोच बदली नहीं है. कई जगहें तो और भी खराब हो चुकी हैं. बौलीवुड में पहले मंगेशकर बहनों के बिना कोई अलबम रिलीज नहीं होता था. अभी अवार्ड शो में केवल पुरुषों को ही संगीत के अवार्ड मिलते हैं, जबकि महिलाओं को बहुत कम.

महिला सिंगर बहुत हैं, लेकिन एकदो का ही नाम सामने आता है. पहले ऐसा नहीं था. इंडस्ट्री में कुछ आजादखयाल के लेखक और संगीतकार हुआ करते थे जो फिल्म द्वारा समाज में कुछ सुधार लाने की सोचते थे. अब फिल्म म्यूजिक में भी महिलाओं की आवाज बहुत कम सुनाई पड़ती है, जो गलत है.

आगे की क्या योजनाएं हैं?

अभी मैं लाल परी मस्तानी शो के अलावा एक फिल्म भी बना रही हूं और स्टेज शो करती हूं्. इन सब में मैं पूरे महीने व्यस्त रहती हूं. मेरी इच्छा बहुत है, पर जिसे हाथ में लिया है उसे अच्छी तरह पूरा करने की कोशिश कर रही हूं.

फिल्मों में गानों का स्तर घट रहा है, इसे कैसे देखती हैं?

पुराने गाने आज भी चलते हैं और अधिक दिनों तक ‘रिमिक्स’ का दौर नहीं चल सकता. नए गानों को लाना ही पड़ेगा.

परिवार का कितना सहयोग रहा?

मेरे पति राम संपत ने मुझे बहुत सहयोग दिया है. उन्होंने मुझे काम करने की पूरी आजादी दी है. हम दोनों एकसाथ बहुत काम करते हैं और एकदूसरे को सहयोग भी देते हैं. कामयाबी का श्रेय मैं अपने परिश्रम और अपने पति राम को देती हूं.

समय मिलता है तो क्या करती हैं?

समय मिलता है तो हर भाषा का लोक संगीत सुनती हूं. लाइट म्यूजिक बहुत सुनती हूं.

नए टैलेंट को इस क्षेत्र में आने के लिए क्या संदेश देंगी?

मुझे बुरा लगता है जब नए बच्चे जल्दी से सिंगर बनने की इच्छा रखते हैं. शौर्टकट कुछ नहीं होता. रिऐलिटी शो में जीतने पर भी आप कुछ अधिक नहीं कर पाते, मेहनत करनी पड़ती है.

सरिता के पाठकों को क्या संदेश देना चाहती हैं?

महिलाएं आत्मनिर्भर बनें. अपनी हर कामयाबी को खुद सैलिब्रेट करें, तभी वे अपने बच्चों को आगे बढ़ा सकती हैं. सहमी, डरी और त्याग करने वाली महिलाएं कभी कुछ नहीं कर पातीं.

VIDEO : हैलोवीन नेल आर्ट

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