सरिता विशेष

बौलीवुड अभिनेत्री रिचा चड्ढा ‘‘गैंग आफ वासेपुर’’, ‘‘मसान’’, “फुकरे रिटर्न’’ सहित कई बेहतरीन फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा दिखा चुकी हैं. वह अपनी फिल्मों की ही वजह से तीन बार ‘कान फिल्म फेस्टिवल’ जा चुकी हैं.

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कुछ दिन पहले ही रिचा चड्ढा अपने प्रेमी व अभिनेता अली फजल का मनोबल बढ़ाने के लिए उनके साथ अमेरिका गयी थीं. वहां औस्कर अवार्ड में अली फजल की अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘‘विक्टोरिया एंड अब्दुल’’ मेकअप व कास्ट्यूम के लिए नोमीनेट हुई थी. औस्कर अवार्ड की समाप्ति के बाद अब रिचा चड्ढा अमेरिका से वापस लौटी हैं.

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तीन बार कान फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा रहने के बाद और ‘औस्कर’ अवार्ड को बाहर से समझने के बाद रिचा चड्ढा मानती हैं कि दोनों में जमीन आसमान का अंतर है.

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हमसे एक्सक्लूसिव बात करते हुए रिचा चड्ढा ने कहा- ‘‘कान फिल्म फेस्टिवल में यूरोपीय सिनेमा के साथ साथ पूरे विश्व के सिनेमा को महत्व दिया जाता है. मगर औस्कर में ज्यादातर अमेरिकन फिल्मों को ही महत्व दिया जाता है. औस्कर में विश्व सिनेमा को लेकर एक छोटी सी कैटेगरी है, जिसे ‘फारेन लैंगवेज’ की कैटेगरी नाम दिया गया है. औ

औस्कर में ब्रिटिश व अमेरिकन फिल्मों का ही महत्व होता है. यूरोपीय सिनेमा को भी कम महत्व मिलता है. पर ‘कान’ में पूरे विश्व को महत्व मिलता है. इसी वजह से ‘कान’ में ‘गैंग्स औफ वासेपुर’, ‘मसान’ सहित कई भारतीय फिल्में जा चुकी हैं. वहां ब्राजील की फिल्में भी आती हैं. इनकी एक शर्त होती है कि यदि आपके देश की कोई फिल्म ‘कान फिल्म फेस्टिवल’ का हिस्सा बनना चाहती है, तो उस फिल्म को उनके देश में दो हफ्ते दिखाया जाना चाहिए. मुझे यह जायज लगता है.’’

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