हिंदी के अलावा मराठी, बंगला, तेलुगू व मलयालम भाषा की फिल्मों में विविधतापूर्ण किरदार निभाने वाली अदाकारा राधिका आप्टे अब वैब सीरीज करने के अलावा अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा का भी रुख कर रही हैं. बहुत जल्द ही वे मिशेल विंटरबौटम की फिल्म ‘वेडिंग गेस्ट’ में देव पटेल के साथ नजर आएंगी. इस के अलावा वे निर्माता से निर्देशक बनी लायडिया डीन की अनाम फिल्म में सारा मैगन थौमस के साथ नजर आएंगी. यह फिल्म दूसरे विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी एक जासूसी फिल्म है. पेश हैं एक मुलाकात के दौरान उन से हुई बातचीत के मुख्य अंश :

अपने कैरियर को ले कर आप कितनी खुश हैं?

मेरे कैरियर का स्वर्णिम व रोचक दौर चल रहा है. फिल्म ‘पैडमैन’ में मेरे अभिनय की काफी तारीफ हुई. इन दिनों मेरे पास कई बड़ी व महत्त्वपूर्ण फिल्में हैं जिन में 2 अंगरेजी फिल्में हैं. वहीं मैं नैटफ्लिक्स के लिए विक्रम चंद्रा के उपन्यास पर आधारित एक वैब सीरीज ‘सैक्रेड गेम्स’ कर रही हूं, जिस में मेरे साथ सैफ अली खान व नवाजुद्दीन सिद्दीकी हैं. मैं श्रीराम राघवन की फिल्म ‘शूट द पियानो प्लेअर’ में आयुष्मान खुराना के साथ काम कर रही हूं. गौरव चावला की फिल्म ‘बाजार’ भी कर रही हूं. मैं ने इंटरनैशनल फिल्म ‘बौमबेरिया’ के अलावा हौलीवुड निर्देशक कल पेन की फिल्म ‘आश्रम’ की है, तो कुछ दूसरी फिल्में भी कर रही हूं.

फिल्म ‘आश्रम’ में मेरे सिवा सभी अमेरिकन कलाकार हैं. फिल्म को भारत में मनाली में फिल्माया गया है. मैं बहुत खुश हूं कि मेरे पास न सिर्फ बड़ी बल्कि बहुत ही अलग तरह की फिल्मों व वैब सीरीज के औफर आ रहे हैं. फिलहाल मैं काम करते हुए एंजौय कर रही हूं.

अब आप भी बौलीवुड की दूसरी अभिनेत्रियों के नकशेकदम पर चलते हुए हौलीवुड की फिल्में कर रही हैं?

हौलीवुड फिल्मों से जुड़ने की मेरी कभी कोई महत्त्वाकांक्षा नहीं रही, पर अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा व विश्व सिनेमा करने की इच्छा रही है. मैं हर भाषा का सिनेमा व उन किरदारों को निभाना चाहती हूं, जिन्हें करना मेरे लिए सहज हो. मैं खुद को एक खास तरह के सिनेमा तक ही सीमित नहीं रखना चाहती. विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर बन रही फिल्म में मैं नूर इनायत खान नामक जासूस का किरदार निभा रही हूं. यह फिल्म ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल की ‘खुफिया सेना’ की इंटैलीजैंस औफिसर वेरा अटकिंस और नूर सहित उन 2 महिला जासूसों की कहानी है, जिन्हें द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान एक मिशन पर फ्रांस भेजा गया था. हम इस फिल्म की कुछ शूटिंग कर चुके हैं.

आप को नूर के किरदार में क्या पसंद आया?

नूर एक अंतर्राष्ट्रीय पात्र है. नूर इनायत खान का जन्म रूस में हुआ था. उस की मां अमेरिकन और पिता भारतीय मुसलिम थे. उस की परवरिश फ्रांस में हुई जबकि उसे ब्रिटिश नागरिकता हासिल थी. वह अपने समय से काफी आगे थी. वह राइटर थी, संगीतकार थी, बहादुर थी. उसे जरमन केंद्रित कैंप में ड्यूटी करते हुए मारा गया था. नूर का किरदार काफी प्रेरणादायक है, तो मैं ऐसे अद्भुत किरदार को निभाने से मना कैसे कर देती.

आप ने ‘हंटर’, ‘पार्च्ड’ सहित कई फिल्मों में काफी बोल्ड सीन दिए हैं?

मैं जिस माहौल से आई हूं, वहां कोई भी किरदार बोल्ड नहीं होता. मैं इस तरह के लोगों से अकसर मिलती रही हूं. बोल्ड किरदार का मतलब ‘सैक्सुअली बोल्ड’ नहीं होता, बल्कि एक स्वतंत्र जिंदगी जीना होता है. बोल्ड तो साहस का परिचायक है. हमारे देश में ही सैक्स को हौआ बना दिया गया है, जबकि मेरी राय में हर स्वस्थ इंसान को सैक्स और भोजन की चाह होनी स्वाभाविक है. सैक्स की ज्यादा भूख गलत नहीं है. सैक्स की कम या ज्यादा भूख तो इंसान की अपनी सोच है. हमारे देश में सैक्स को ले कर खुलेआम चर्चा नहीं होती, इसलिए यह हौआ बना हुआ है.

फिल्म ‘बाजार’ में तो आप का ग्लैमरस किरदार है?

मेरे लिए ‘बाजार’ अलग तरह की फिल्म है. इस तरह की फिल्म या किरदार इस से पहले मैं ने नहीं किया है. यह सच है कि मैं ने इस फिल्म में पहली बार अति ग्लैमरस किरदार निभाया है. फिल्म की कहानी शेयर बाजार में आने वाले उतारचढ़ाव को ले कर है. इस फिल्म में मेरे किरदार में कई शेड्स हैं. फिल्म में मेरे ज्यादातर सीन चित्रांगदा सिंह के बजाय सैफ अली खान के साथ हैं. सैफ अली के साथ काम करने के मेरे अनुभव काफी अच्छे रहे. वे बेहतरीन सहकलाकार हैं.

वूमन इंपावरमैंट को ले कर आप की क्या सोच है?

मेरा मानना है कि वूमन इंपावरमैंट तब तक सही अर्थों में नहीं हो सकता जब तक लिंगभेद कायम रहेगा. आज की तारीख में पुरुष व नारी में समानता होनी चाहिए.

बौलीवुड में ‘मी टू मोमैंट की क्या स्थिति है?

बौलीवुड एकदम अलग तरह की फिल्म इंडस्ट्री है. यहां फिल्मों में काम पाने का तरीका भी अलग है. मसलन, विदेशों में कलाकार अभिनय स्कूल से प्रशिक्षण ले कर ही फिल्मों में आते हैं, फिर वहां एजेंट होते हैं. एजेंट प्रतिभाशाली कलाकारों को स्कूल या थिएटर से ले जाते हैं, जबकि भारत में ऐसा कुछ भी नहीं है. हौलीवुड में जिस तरह से पुरुष और औरत एकसाथ आ कर टीम बना कर कहते हैं कि हम यहां ऐसा नहीं होने देंगे, वैसा ही बौलीवुड में भी होना चाहिए.

बौलीवुड में महिलाओं के शोषण की काफी बातें होती हैं?

देखिए, लोग बौलीवुड को जादुई नगरी समझते हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है. यह एक फिल्म इंडस्ट्री है. लोग अपने सपनों को पूरा करने की सोच के साथ बौलीवुड में आते हैं. वे इतने महत्त्वाकांक्षी होते हैं कि कुछ भी करने को तैयार रहते हैं. जिस तरह विश्व में हर जगह बिना लिंग भेद के ताकतवर शोषण करता है, वैसा ही यहां भी है. मेरी राय में पुरुष या नारी के बजाय उम्र का शोषण होता है. लोग शोषित होते रहते हैं, पर आवाज नहीं उठाते.

अभिनय के अलावा क्या करना चाहती हैं?

लिखना चाहती हूं. गीत गाना चाहती हूं, पर फिल्मों में गाने का मौका मिलेगा, ऐसा मुझे लगता नहीं है.