कुछ साल से बौलीवुड से लेकर हौलीवुड तक हर जगह ‘कास्टिंग काउच’ पर खुलकर चर्चा हो रही है, हालांकि अब भी कई लोग ऐसे हैं जो इस बहस का हिस्सा ही नहीं बनना चाहते. बता दें कि इस मुद्दें पर बहस की शुरुवात तब हुई जब हौलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वेनस्टीन पर यौन शोषण के आरोपों लगे. उनपर आरोप लगने के बाद सोशल मीडिया पर चलाए गए #MeToo कैंपेन से लोगों ने अपने कड़वे अनुभव शेयर करना शुरू किया. फिर धीरे धीरें #MeToo कैंपेन के साथ कई लोग जुड़े. फिर क्या था यह मामला हमें और गहराई में ले गया. पर्दे के पीछे छिपे एक काले और भयावह सच से लोग वाकिफ होने लगे. इस कैंपेन ने न सिर्फ लोगों को इस मामले पर बात करने की हिम्मत दी बल्कि पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया.

वहीं दूसरी तरफ जहां हौलीवुड में मशहूर एक्टर-एक्ट्रेस ने खुलकर इस मुद्दे पर बोलना शुरू किया तो वहीं बौलीवुड में इस पर दो अलग-अलग राय देखने को मिली. बौलीवुड की कई हस्तियों ने कास्टिंग काउच के मुद्दे को उठाया तो किसी ने इससे इनकार किया. हाल ही में फिल्म ‘संजू’ के टीजर लौन्च के बाद रणबीर कपूर ने कहा कि उन्हें कभी इसका सामना नहीं करने को मिला. वहीं तेलुगू अभिनेत्री श्री रेड्डी द्वारा कास्टिंग काउच के खिलाफ टापलेस होकर प्रदर्शन और सरोज खान का इस मुद्दे पर विवादित बयान से तो सभी परिचित हैं. तेलुगू अभिनेत्री श्री रेड्डी ने कहा था कि सरोज मैम को लेकर मेरे मन में जो सम्मान था वो अब नहीं रहा है. उनकी बातें तो इस ओर इशारा करती हैं कि हमें खुद को प्रड्यूसर के हवाले कर देना चाहिए.

इन सबके बीच कास्टिंग काउच पर एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा से बात हुई तो उन्होंने इस मुद्दे पर अपना बोल्ड स्टेटमेंट दिया. ‘अभी तोह पार्टी शुरु हुई है’ के सेट पर ऋचा ने एक हिन्दी चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि रणबीर ने क्या कहा मुझे इसके बारे में नहीं पता है. उन्होंने हंसते हुए कहा रणबीर ने इसका सामना नहीं किया होगा. हो सकता है कि उसे इसका अनुभव ही नहीं रहा हो. यह तो स्पष्ट है, कि फिल्म इंडस्ट्री के भीतर के लोगों के अनुभव और बाहर से आए लोगों के अनुभव अलग-अलग रहे हो. लेकिन जहां तक मुझे लगता है, यह एक ट्रेंडिग टौपिक बन गया है इसलिए प्रेस भी श्री रेड्डी और सरोज खान जैसे कुछ अन्य लोगों को जोड़कर इसे कवर करने की कोशिश में लगी है. लेकिन मैं ये भी कहूंगी कि कास्टिंग काउच निहायती घटिया काम है. यह वास्तव में घृणित अभ्यास है.

ऋचा ने आगे कहते हैं कि #MeToo कैंपेन से मुझे सच में बेहद उम्मीद थी कि भारत में भी बहुत से लोग होंगे जो बाहर आएंगे और इस पर बिना शर्म के खुलकर बात करेंगे. मैंने यह भी सोचा था कि जैसे ही मामले सामने आना शुरू होंगे लोगों पर कार्रवाई भी होगी, क्योंकि इस सच को कोई नहीं झुठला सकता कि यहां महिलाएं लंबे समय से पीड़ित हैं. हां इस मसले पर मेरी दिलचस्पी बौलीवुड के परिप्रेक्ष्य से नहीं है, क्योंकि बौलीवुड भी एक बड़ा उद्योग क्षेत्र बन चुका है. मैंने धरातल की हकीकत जानने के लिए बलात्कार और तस्करी के पीड़ितों के साथ भी काम किया है, यही नहीं मैंने उनके लिए एक फंडिंग भी शुरू की. लेकिन अब मुझे लगता है कि यहां कुछ भी नहीं होने वाला है. परिस्थितियां बदलने वाली नहीं है, यह वैसी ही रहेंगी जैसी पहले थी. देश में फिल्म जगत के कालाकारों की रक्षा करने के लिए तो कोई व्यवस्था ही नहीं है. मुझे अब कोई उम्मीद नहीं रह गई है इससे. ऋचा कहती हैं भारत में ऐसे मामलों को राजनीति करने के लिए रखा जाता है. चुनाव के माहौल में इसे सांप्रदायिक और राजनीतिक विषय बना देना बिल्कुल गलत है. अगर कोई भी कानून बलात्कारियों का बचाव कर रहा है, तो ये मेरे लिए घृणा का विषय है.

आपको बता दें कि जल्द ही ऋचा चड्ढा ‘अभि तोह पार्टी शुरु हुई है’ फिल्म में नजर आएंगी. इसमें उनके सात प्रतीक बाबर, श्रीया पिलगोंकर, उमेश शुक्ला, दिव्य दत्ता, पंकज त्रिपाठी, मनोज पहवा, पवन मल्होत्रा, विनय पाठक भी हैं. सोनी पिक्चर्स नेटवर्क प्रोडक्शंस, स्नेहा रजानी और अनुभाव सिन्हा द्वारा निर्मित 2018 में ही रिलीज होने की संभावना है.

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