भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार पवन सिंह की फिल्में उत्तर प्रदेश, बिहार के अलावा देश के तमाम हिस्सों के साथसाथ विदेशों में भी पसंद की जाती हैं.

इस साल पवन सिंह डायैक्टर सुजीत कुमार सिंह की फिल्म ‘वांटेड’ में नजर आएंगे. यह भोजपुरी की सब से बड़े बजट वाली फिल्म होगी. इस फिल्म के ज्यादातर हिस्सों की शूटिंग पूर्वी उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हुई है.

फिल्म ‘वांटेड’ की शूटिंग के सैट पर पवन सिंह से लंबी बातचीत की गई. पेश हैं, उस के खास अंश:

यह माना जाता है कि भोजपुरी फिल्मों के हिट होने के पीछे कहानी के अलावा गानों का भी अहम रोल होता है. आप ने अपने कैरियर की शुरुआत बतौर भोजपुरी गायक की थी. इस बारे में आप क्या कहेंगे?

भोजपुरी ही नहीं बल्कि दूसरी किसी भारतीय भाषा में बनने वाली फिल्मों के हिट होने में गानों का अहम रोल होता है. अगर फिल्म की कहानी में थोड़ीबहुत कमी भी हो तो अच्छे गाने और म्यूजिक वाली फिल्में हिट साबित होती हैं. अगर भोजपुरी फिल्मों के गानों के बारे में कहें तो ये इन की जान होते हैं.

भोजपुरी फिल्मों पर साफसुथरी, पारिवारिक न होने के आरोप लगते रहे हैं. इस पर आप क्या कहेंगे?

ऐसा बिलकुल नहीं है. भोजपुरी में एक कहावत है नामी बनिया, बदनामी चोर यानी भोजपुरी को जानबूझ कर बदनाम किया जा रहा है. सच तो यह है कि भारत में बन रही दूसरी भाषाओं की फिल्मों से भोजपुरी फिल्में ज्यादा साफसुथरी बन रही हैं. यही वजह है कि दूसरी भाषाओं की तरह भोजपुरी में बनने वाली फिल्मों को आज तक ‘ए सर्टिफिकेट’ नहीं मिला है. बात अगर भोजपुरी फिल्मों के दो मतलब वाले डायलौग की है तो इन में भोजपुरी की मिठास छिपी हुई है. हां, कुछ कमियां हैं, जिन्हें दूर किए जाने की जरूरत है.

भोजपुरी फिल्मों में किस तरह के बदलाव आ रहे हैं?

अब भोजपुरी फिल्मों के फाइट सीन ऐक्सपर्ट फाइट मास्टर के डायरैक्शन में फिल्माए जा रहे हैं. इन में हाई टैक्नोलौजी, लाइटिंग, कैमरा, ग्राफिक वगैरह का इस्तेमाल होने लगा है.

आजकल ज्यादातर हिंदी फिल्में मुंबई की फिल्म सिटी के महंगे सैटों के साथसाथ विदेशों तक में फिल्माई जा रही हैं जबकि भोजपुरी की फिल्में गांवों, कसबों और छोटे शहरों में फिल्माए जाने की ओर रुख कर रही हैं. ऐसा क्यों?

भोजपुरी फिल्मों की आत्मा गांवों में बसती है, जिसे मुंबई की महंगी फिल्म सिटी और विदेशों में फिल्माना मुमकिन नहीं है. भोजपुरी इंडस्ट्री अपनी संस्कृति और सभ्यता को ध्यान में रख कर ही फिल्में बना रही है.

मैं यहां एक बात और कहना चाहूंगा कि इस से फिल्मों के बनाने के ऊपर आने वाले फालतू खर्चों में कमी आती है. बचे पैसों से फिल्मों की तकनीक बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

सुना है कि फिल्म ‘वांटेड’ में आप के साथ 2-2 हीरोइनें काम कर रही हैं?

जी हां. मेरे साथ पश्चिम बंगाल की मणि भट्टाचार्य और मध्य प्रदेश राज्य की अमृता आचार्य ने काम किया है. ये दोनों ही पहले भी भोजपुरी फिल्में कर चुकी हैं.

क्या वजह है कि भोजपुरी फिल्में 100 करोड़ के क्लब में शामिल रहने में नाकाम रही हैं?

भोजपुरी कलाकारों का टकराव खत्म हो जाए और लोग आपस में दिल से मिल कर काम करना शुरू कर दें तो वह दिन दूर नहीं जब भोजपुरी फिल्में भी 100 करोड़ के क्लब में शामिल होने लगेंगी.

VIDEO : एविल आई नेल आर्ट

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