हिंदी सिनेमा जगत में चार दशक से अधिक समय बिता चुके और सदी के महानायक के रूप में परिचित अभिनेता अमिताभ बच्चन से कोई अपरिचित नहीं. वे हिंदी सिनेमा जगत के सबसे प्रभावशाली अभिनेता माने जाते हैं. सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के तौर पर उन्हें कई बार राष्ट्रीय पुरस्कार, पद्मश्री और पद्मभूषण से भी नवाजा गया है. फिल्मों के अलावा वे गायक, निर्माता और टीवी शो प्रेजेंटर भी हैं. हालांकि उनका शुरुआती दौर बहुत अच्छा नहीं था, लेकिन फिल्म ‘जंजीर’ उनके कैरियर का टर्निंग प्वाइंट था. जिसके बाद से उन्हें पीछे मुड़कर देखने का समय नहीं मिला. वे आज भी उतने ही दर्शकों में पोपुलर हैं जितने सालों पहले थे. यही वजह है कि आज उन्हें ध्यान में रखकर कहानियां लिखी और बनायीं जाती है. अभी वे कौन बनेगा करोड़पति के दसवें सीजन को फिर से होस्ट कर रहे हैं. पेश है उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश.

ये शो आपको किस तरह से प्रेरित करता है? इस शो ने आपको कितना बदला है?

इस शो से मुझे साधारण लोगों के संघर्ष और जीवन के बारें में जानने का मौका मिलता है, जो मुझे बहुत प्रेरित करता है. ये लोग बहुत ही संघर्षपूर्ण जीवन बिताने के बाद भी खुश रहते हैं और आगे बढ़ते रहते हैं, लेकिन मुझे दुःख तब होता है, जब वे कई बार मेहनत कर मंच तक पहुंचते हैं और अंत में गलत जवाब की वजह से सारे जीते हुए पैसे को हार जाते हैं.

यहां जो भी आते हैं उनसे एक संपर्क जुड़ जाता है. उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है. मेरे लिए ये एक नयी जानकारी होती है. फिल्मों में सारी बातें लिखी हुई होती है, पर यहां सब ओरिजनल होता है जो मुझे बहुत पसंद है.

क्या आपके जीवन में कोई संघर्ष था?

शुरू में बहुत था, लेकिन मैंने ये तय कर लिया था कि मुझे अभिनय की दिशा में ही आगे बढ़ना है. मैंने वैसा ही किया और यहां तक पहुंचा. असल में कोई भी व्यक्ति जब अपनी मंजिल तक पहुंचना चाहता है तो उसे रास्ते में बहुत कठिनाइयां आती है और उससे उसे खुद ही निकलना पड़ता है.

आजकल डिजिटल मीडिया काफी आगे बढ़ चुका है बच्चे भी इसके आदि हो चुके हैं ये उनके लिए कितना सही कितना गलत है?

ये सही है कि आजकल छोटे-छोटे बच्चे भी मोबाइल पर रहते हैं इससे उनकी कम्युनिकेशन स्किल कम होती जा रही है. नयी खोज है जो रहेगी पर माता-पिता को उसका ध्यान रखना चाहिए. घर में भी आजकल कोई एक दूसरे से बात नहीं करता और सब मोबाइल से बातें करते है. आज के यूथ एक साथ कई काम कर सकते है, जो पहले संभव नहीं था.

आपका कई सामाजिक कार्य से जुड़ने की वजह क्या है? आगे और क्या करना चाहते हैं?

मैं कई सामाजिक कार्य से जुड़ा हुआ हूं, क्योंकि इसमें सुधार की जरुरत है. पोलियो में मैंने 8 साल काम किया और अब भारत पोलियो मुक्त हुआ. हेपेटाइटिस बी से मैं जुड़ा हुआ हूं, क्योंकि मैं खुद इसका मरीज हूं. जब मैं फिल्म ‘कुली’ के दौरान दुर्घटना ग्रस्त हुआ तो खून की जरुरत थी, जिसमें 200 लोगों ने खून दिया था जिस दौरान एक व्यक्ति हेपेटाइटिस बी का मरीज था. मुझे ये सालों बाद पता चला कि मुझे हेपेटाइटिस बी है और मैं अभी 25 प्रतिशत लीवर के साथ जी रहा हूं. इसके कैम्पेन के साथ मैं जुड़ा हूं. इसमें मेरा कहना है कि अगर आपको कोई भी बीमारी है तो उसका इलाज सही तरह से सही डाक्टर से करवाएं. इसके आगे किसानो के आत्महत्या को कम करने और सीमा पर रहने वाले शहीद हो चुके सेना के परिवार वालों के लिए भी काम कर रहा हूं.

आप महिलाओं को बहुत सम्मान देते हैं, अपने जीवन में आप किस महिला अभिनेत्री से बहुत प्रेरित रहे?

वहीदा रहमान, मीना कुमारी, नूतन और दक्षिण में सावित्री ये सभी अद्भुत कलाकार हैं. मैंने वहीदा रहमान और नूतन के साथ काम किया है और सपने में भी कभी सोचा नहीं था कि कभी इनके साथ काम करने का मौका मिलेगा. दिलीप कुमार का भी मैं बहुत बड़ा फैन हूं. अभी की नयी पीढ़ी में आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण और अनुष्का शर्मा ये सभी बहुत अच्छा काम करते हैं, उनके साथ काम करने में डर लगता है. मैं सालों साल काम करने के बाद यहां तक पहुंचा हूं और ये तो पहले दिन से ही इतनी प्रतिभावान हैं कि इनका मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है. वे आत्मविश्वास से भरपूर हैं.

आजकल हिंदी भाषा का प्रचार और प्रसार कम होता जा रहा है, नयी जेनरेशन को तो हिंदी ठीक से बोलना ही नहीं आता, ऐसे में क्या हिंदी और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को कोई खतरा महसूस होता है? आपके घर में कौन सी भाषा बोली जाती है?

इस बात से मैं कुछ हद तक सहमत हूं. हमारे सामने जो हिंदी लिखकर आती है वह अंग्रेजी में होती है और मैं उसको पढ़ नहीं पाता और उसे वापस लौटाकर देवनागरी में मंगवाता हूं. मेरे हिसाब से अगर हिंदी का कार्यक्रम है, तो हिंदी में बोलना ही अच्छा होता है. अंग्रेजी आजकल थोड़ी प्रबल हो चुकी है जो चिंता का विषय है. मेरे घर में दोनों ही भाषाएं बोली जाती है, क्योंकि हमारे घर में कुछ लोग उत्तर भारतीय और कुछ दक्षिण भारतीय हैं, इसलिए सभी का ख्याल रखना पड़ता है. साथ ही साथ बंगाल का भी ध्यान रखना पड़ता है.