सरिता विशेष

अत्यंत भोली और खूबसूरत अभिनेत्री तापसी पन्नू ने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत तमिल, तेलुगू और हिंदी फिल्मों से की. बचपन में तापसी को अभिनेत्री बनने का शौक नहीं था. दिल्ली की रहने वाली तापसी एक सौफ्टवेयर इंजीनियर है. पढ़ाई के दौरान बीचबीच में शौकिया तौर पर मौडलिंग कर वह अपना जेबखर्च चलाती थी. वह कुछ अलग करना चाहती थी, लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे. इतना ही नहीं उस ने 2008 में पैंटालून फेमिना मिस फ्रैश फेस और साफी फेमिना मिस ब्यूटीफुल स्किन का खिताब भी जीता. वह काफी मेहनती है और हर फिल्म में अपना सौ फीसदी देने की वचनबद्धता रखती है. फिल्म ‘पिंक’ में उस ने मोलेस्टेशन की शिकार युवती की भूमिका बखूबी निभाई है.

वह पिछले 6 साल से फिल्म इंडस्ट्री में है. अपनी जर्नी उस ने दक्षिण भारतीय फिल्मों से शुरू की. बौलीवुड इंडस्ट्री में वह 3 साल पहले आई. वह एक इंजीनियर है और उस की अच्छी कंपनी में जौब भी लग गई थी, लेकिन उस ने जौइन नहीं किया, क्योंकि वह तो इस क्षेत्र में जाना ही नहीं चाहती थी. उस की एमबीए करने की इच्छा थी. वह मार्केटिंग की जौब चाहती थी

पहले साल उस के लिए परीक्षा दी, लेकिन वह अपनी परफौर्मैंस से संतुष्ट नहीं थी. दोबारा परीक्षा देने की सोची और इस दौरान कुछ करने की योजना बनाई. पहले से ही कुछ औफर उसे दक्षिण भारतीय फिल्मों के मिल रहे थे, क्योंकि पढ़ाई के दौरान वह पौकेटमनी के लिए मौडलिंग करती थी, जिस कारण लोगों के पास उस की तसवीरें थीं. उन्होंने उसे औफर देना शुरू कर दिया, लेकिन उस ने कहा कि मुझे न तो दक्षिण भारतीय भाषा आती है और न ही ऐक्टिंग, तो मैं कैसे काम करूंगी? तब उसे हिंदी फिल्मों के औफर नहीं मिल रहे थे, इसलिए उस ने सीरियसली नहीं लिया. साउथ की फिल्में बड़े नाम वाली थीं साथ ही तापसी से कहा गया कि यहां आ कर सभी भाषा सीख लेते हैं. फिर तापसी वहां गई और एकसाथ 2 फिल्में तमिल और तेलुगू में करने लगी.

पहली फिल्म रिलीज होने से पहले ही उस ने 3 फिल्में और साइन कर ली थीं. दोनों फिल्में दोनों भाषाओं में हिट हो गईं. इस तरह से तापसी का फिल्मी सफर शुरू हो गया. काम करतेकरते एक दिन फोन आया कि डेविड धवन की फिल्म ‘चश्मेबद्दूर’ में काम करना है. वह उन से जा कर मिली और तब से हिंदी फिल्मों की ओर रुख कर लिया. तापसी पन्नू को फिल्मों में आने की प्रेरणा किसी से नहीं मिली. वह आम युवतियों की तरह फिल्में देखती थी, कोई पैशन नहीं था. किसी ऐक्टर को ले कर क्रेजी या फैन्स वाली फीलिंग्स भी नहीं थीं. इसलिए काम करतेकरते चाहत बनी.

‘‘मेरे परिवार वालों का मुझे यहां तक पहुंचाने में बहुत बड़ा योगदान रहा. उन्होंने कभी मुझ से प्रश्न नहीं किया कि मैं कहां क्या कर रही हूं? उन को विश्वास था कि मैं जो भी करूंगी, सही करूंगी. उन के प्रयास से ही मैं ने इन ऊंचाइयों को छुआ.’’ तापसी का कहना है. 

यहां तक का सफर तय करने में तापसी को काफी जद्दोजेहद करनी पड़ी. साउथ में तो तापसी की पहली फिल्म हिट हो गई थी, लेकिन अब प्रश्न यह था कि आगे क्या करे. ऐक्टिंग अब करती रहनी पड़ेगी और जिसे ऐक्टिंग ही नहीं आती हो, उस के लिए अपने लैवल को उठाना आसान नहीं होता. दिल्ली में डीटीसी बसों में तापसी ने काफी ट्रैवल किया है. इस दौरान उस ने देखा कि अकसर सिरफिरे महिलाओं को छूने की कोशिश करते हैं. तापसी ने न तो कोई रिसर्च किया और न ही किसी ऐसी लड़की से मिली जिस ने उस की मदद की हो. अकसर लड़की को चाहिए कि यदि कोई लड़का उसे छुए तो वह कैसे व्यवहार करे.

निर्देशक सुजीत सरकार दिन में केवल एक बार आ कर कहते थे कि यदि आप के साथ ऐसा हुआ है, तो वही दिमाग में रखना है. फिर वह सीन को समझ जाती थी. वही काफी होता था तापसी के लिए, क्योंकि 2 महीने बाद तापसी को लगने लगा था कि वाकई उस के साथ ऐसा कुछ हुआ है. इस फिल्म से वह कुछ बदली नहीं है. काफी सालों से वह इस खास विषय से जुड़ी है. वह एक रेप विक्टिम एनजीओ के साथ काम करती है. समय मिलने पर वह अखबार पढ़ती है और मजबूती से इस बारे में बात भी करती है. पहले महिलाएं अपने साथ होने वाले अन्याय को चुपचाप सहती थीं अब वे इन घटनाओं की रिपोर्ट करती हैं. लेकिन मीडिया की भागीदारी भी इस में अधिक है इसलिए यह अधिक दिखता है. कुछ फर्जी घटनाएं भी होने लगी हैं.

तापसी ने प्रकाश राज की फिल्म ‘तड़का’ के लिए अपने बाल कलर करवाए थे. फिल्म खत्म होने के बाद उस के बाल काफी खराब भी हो गए थे. इसलिए उस ने उन्हें कटवा दिया. फिर साकिब के साथ फिल्म ‘मखना’ करनी थी, जिस में आधी फिल्म के बाद लुक बदलना था. ऐसे में उसे बाल कटवाना ही सही लगा. तापसी का कोई पर्टिकुलर डिजाइन नहीं है. उस की स्टाइलिश देवकी है. वह जो कहती है वह फौलो करती है. तापसी फिल्म निर्देशक  मणिरत्नम की फिल्म करना चाहती है और फवाद अफजल खान के साथ अभिनय करना चाहती है.

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