सरिता विशेष

फिल्म ‘‘मदारी’’ को आम दर्शकों तक पहुंचाने के लिए इरफान ने अपनी इस फिल्म को हौलीवुड स्टाइल में जमकर प्रचारित किया. पर उनका सारा प्रयास, सारी मेहनत काम नहीं आयी. फिल्म ‘‘मदारी’’ ने पूरे देश में बाक्स आफिस पर पहले दिन दो करोड़ पच्चीस लाख तथा दूसरे दिन तीन करोड़ पचास लाख रूपए ही कमाए.

अपनी फिल्म ‘‘मदारी’’ को सही ढंग से प्रचारित करने के लिए इरफान ने कई तरह के गुणा भाग लगाए. अपनी फिल्म को सुरक्षित रिलीज के लिए उन्होने दस जून की बजाय 15 जुलाई को रिलीज करने का फैसला किया और सारा काम छोड़कर वह पूरे दो माह तक अपनी इस फिल्म के प्रचार के लिए अकेले ही जुटे रहे. इरफान ने मुंबई की लोकल ट्रेन में फिल्म के प्रचार का आडियो टेप पूरे दो दिन तक लगातार बजवाया. यह पहला मौका था, जब किसी ने अपनी फिल्म को प्रचारित करने के लिए मुंबई की लोकल ट्रेन का उपयोग किया हो. इरफान ने कई शहरों की यात्रा की. पटना में लालू यादव से लेकर दिल्ली में अरविंद केजरीवाल तक से मुलाकात की. पर इतना सब करते हुए इरफान यह भूल गए कि राजनेताओं के साथ डमरू बजाने से फिल्म को दर्शक नहीं मिलते. दूसरी बात फिल्म के प्रमोशन के वक्त इरफान अपनी फिल्म की कहानी को छिपाने के प्रयास में राजनेताओं की ही तरह हवाबाजी मे बड़ी बड़ी बाते करते रहे. इसी का खमियाजा उन्हे भोगना पड़ रहा है.

मजेदार बात यह है कि फिल्म ‘‘मदारी’’ के प्रमोशन के ही सिलसिले में जब इरफान पत्रकारों से मिल रहे थे, तो ‘‘सरिता’’ पत्रिका से बात करते हुए इरफान ने कहा था-‘‘सिनेमा को लेकर मैं सब कुछ समझ चुका हूं. मैंने समझा कि दर्शकों को इंगेज करके मैं सिर्फ उन्हें अपना दर्द नहीं बता सकता. मैं उन्हें सिर्फ नसीहत नहीं दे सकता. मैं अपने अंदर चल रहे इमोशन को उन तक नही पहुंचा सकता. इसके लिए मुझे सबसे पहले मनोरंजक तरीके से दर्शकों को इंगेज करना पड़ेगा. मेरे लिए सिनेमा सिर्फ मनोरंजन या सिर्फ इंगेज करने का साधन नहीं है. सिनेमा इमोशन का माध्यम है. इसलिए दर्शक को दोनों तरह से इंगेज करना पड़ेगा.’’

इरफान ने सिनेमा को लेकर अपनी समझ को लेकर जो कुछ कहा था, वह उसे अपनी फिल्म ‘‘मदारी’’ का हिस्सा बनाने में असफल रहे. इरफान ने फिल्म को प्रचारित करने के लिए हौलीवुड स्टाइल को अपनाया, मगर दस साल से हौलीवुड फिल्मों में अभिनय करते हुए वह यह नहीं समझ पाए कि फिल्म कैसी बनायी जानी चाहिए. हौलीवुड फिल्में भारत में सफलता के तमगे गाड़ रही हैं. मगर हौलीवुड फिल्मों में अभिनय करने के बावजूद इरफान नहीं समझ पाए कि फिल्म में कहानी किस स्तर पर महत्व दिया जाना चाहिए. क्या इरफान भूल गए कि हौलीवुड में फिल्म की कहानी व पटकथा पर सबसे अधिक जोर दिया जाता है.

इरफान का दावा है कि फिल्म ‘‘मदारी’’ में उन्होने आम इंसान को जगाने की बात की है. उन्होने फिल्म में जबाबदेही तय करने की बात की. उन्होने आम इंसान की बेबसी के साथ एक पिता का दर्द बयां करते हुए दर्शक को इमोशनली जोड़ने की बात की है. मगर सच यह है कि फिल्म के अंदर इन बातों को सही अंदाज में पेश करनें में वह असफल रहे. अब शायद इरफान को अहसास हो रहा होगा कि फिल्म के निर्देशक के तौर पर इस फिल्म से निशिकांत को जोड़ना उनकी सबसे बड़ी भूल रही. फिल्म में इमोशन कहीं नहीं है. फिल्म के अंदर इरफान रो रहे थे, पर दर्शक हंस रहा था. फिल्म ‘‘मदारी’’ से आम इंसान गायब है. फिल्म में भारतीय पिता कहीं उभर ही नहीं पाया. ऐसे में दर्शक फिल्म ‘मदारी’ के संग कैसे जुड़े? उम्मीद है कि अभिनेता के साथ साथ निर्माता बन चुके इरफान अपनी अगली फिल्म में सिनेमा की अपनी समझ को सही मायनों में उपयोग करने का प्रयास करेंगे.