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दो हजार सतरा, लोकतंत्रों को खतरा
By जगदीश पंवार | 1 January 2017
जो जनसैलाब पहले भ्रष्ट बेईमान, धार्मिक, सामंती व तानाशाही सत्ताधारी दलों के खिलाफ उमड़ता था, वह कहां गया? ये सब लोकतंत्रों में खतरे की निशानी हैं. जरा सावधान रहें.